Post Views: 680 के.के. वर्मा भारतमें पेट्रोलियम उत्पादोंकी कीमतोंमें निरन्तर इजाफा देश कई समस्याओंका जनक कहा जा सकता है। महंगी चरमपर है। हर चीज महंगी हो गयी है। रोटी, कपड़ा और मकान मूलभूत जरूरत है, वह भी आसानीसे मुहैया नहीं हो पा रही है। नियंत्रण करनेकी दिशामें कहनेको कुछ कहनेकी आजादी है परन्तु होता कुछ […]
Post Views: 1,318 ब्रह्मïांडमें प्राकृतिक दुनियाकी सबसे बेशकीमती एवं खूबसूरत संपदा पेड़-पौधोंसे लबरेज वन हैं। प्राचीन कालसे वन्य क्षेत्र जंगली जानवरों एवं मानवताके लिए अनमोल प्राकृतिक संसाधन रहे हैं। देशकी सियासत एवं तमाम इंतजामिया हालमें संपन्न हुए लोकसभा चुनावोंमें मशगूल थे, परन्तु हिमाचल सहित कई अन्य राज्योंमें जंगल दावानलकी चपेटमें आ चुके थे। नब्बे प्रतिशतसे […]
Post Views: 682 डा. अजय खेमरिया कभी बामन बनियों और बाजारवालों (मतलब शहरी इलाके) की पार्टी रही भाजपा आज अखिल भारतीय प्रभावके चरमपर है। पांच राज्योंके विधानसभा चुनावोंके शोरमें कुछ अहम सवालोंके साथ विमर्शको आमंत्रित करता है। सवाल यह कि क्या भाजपाका अभ्युदय केवल एक चुनावी हार-जीतसे जुड़ा घटनाक्रम है। हर दलके जीवनमें उतार-चढ़ाव आते […]