वाराणसी

जैविक उत्पादका मिले उचित मूल्य-मण्डलायुक्त


मण्डलायुक्त श्री दीपक अग्रवाल ने कहां कि जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए कृषक के जैविक उत्पाद का उचित मूल्य एवं उपभोक्ता को क्रय उत्पाद के उपभोग की संतुष्टि बहुत आवश्यक है। जैविक उत्पादन के लिए कृषकों को संगठित करना एवं उत्पाद का प्रमाणीकरण (जैविक) कराना एवं संयुक्त रूप से विपणन के महत्व पर काम करने की आवश्यकता पर बल दिया। श्री दीपक अग्रवाल की अध्यक्षतामें शुक्रवारको मण्डलायुक्त सभागारमें जैविक खेती एवं उसके प्रमाणी करण पर आधारित कार्यशालके उद्घाटन अवसरपर बोल रहे थे। इस दौरान डॉक्टर केतकी बापट वरिष्ठ वैज्ञानिक विज्ञान भवन नई दिल्ली द्वारा जैव विविधता मिशन के महत्व एवं भूमि में कार्बन के महत्व के बारे में जानकारी दी गयी तथा कृषक प्रक्षेत्र पर उसकी भूमि में कार्बन की उपलब्धता मानक हेतु विकसित किट की कार्यप्रणाली के बारे में बताया गया तथा इसकी कृषक प्रक्षेत्र पर उपयोगिता एवं तुरंत परिणाम प्राप्त करने की क्षमता एवं उसके अनुरूप खाद एवं जैविक उर्वरक के प्रयोग की अनुशंसा पर विस्तृत चर्चा की गयी। डॉ एस. मेहेत्रे वैज्ञानिक बीएआरसी पुणे द्वारा मृदा कार्बन तत्व जांच करने वाले कीट के प्रयोग की तकनीकी से बेव कांफ्रेंसिंग के माध्यम से बताया गया।
कृषि एवं उद्यान विभाग के अधिकारियों द्वारा जनपद में कृषि एवं उद्यान के अंतर्गत प्रमुख आच्छादित फसलें एवं उनके विस्तार की संभावनाओं पर चर्चा की गयी। इकोसर्ट के प्रतिनिधि द्वारा जैविक खेती के लिए पंजीयन की प्रक्रिया के संबंध में जानकारी दी गयी। कार्यशाला में जनपद के उपयोग एवं प्रगतिशील किसान शामिल हुए।
मण्डलायुक्त श्री दीपक अग्रवाल ने कहां कि जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए कृषक के जैविक उत्पाद का उचित मूल्य एवं उपभोक्ता को क्रय उत्पाद के उपभोग की संतुष्टि बहुत आवश्यक है। जैविक उत्पादन के लिए कृषकों को संगठित करना एवं उत्पाद का प्रमाणीकरण (जैविक) कराना एवं संयुक्त रूप से विपणन के महत्व पर काम करने की आवश्यकता पर बल दिया। श्री दीपक अग्रवाल की अध्यक्षतामें शुक्रवारको मण्डलायुक्त सभागारमें जैविक खेती एवं उसके प्रमाणी करण पर आधारित कार्यशालके उद्घाटन अवसरपर बोल रहे थे। इस दौरान डॉक्टर केतकी बापट वरिष्ठ वैज्ञानिक विज्ञान भवन नई दिल्ली द्वारा जैव विविधता मिशन के महत्व एवं भूमि में कार्बन के महत्व के बारे में जानकारी दी गयी तथा कृषक प्रक्षेत्र पर उसकी भूमि में कार्बन की उपलब्धता मानक हेतु विकसित किट की कार्यप्रणाली के बारे में बताया गया तथा इसकी कृषक प्रक्षेत्र पर उपयोगिता एवं तुरंत परिणाम प्राप्त करने की क्षमता एवं उसके अनुरूप खाद एवं जैविक उर्वरक के प्रयोग की अनुशंसा पर विस्तृत चर्चा की गयी। डॉ एस. मेहेत्रे वैज्ञानिक बीएआरसी पुणे द्वारा मृदा कार्बन तत्व जांच करने वाले कीट के प्रयोग की तकनीकी से बेव कांफ्रेंसिंग के माध्यम से बताया गया। कृषि एवं उद्यान विभाग के अधिकारियों द्वारा जनपद में कृषि एवं उद्यान के अंतर्गत प्रमुख आच्छादित फसलें एवं उनके विस्तार की संभावनाओं पर चर्चा की गयी। इकोसर्ट के प्रतिनिधि द्वारा जैविक खेती के लिए पंजीयन की प्रक्रिया के संबंध में जानकारी दी गयी। कार्यशाला में जनपद के उपयोग एवं प्रगतिशील किसान शामिल हुए।