Post Views: 833 हेमन्त रिछारिया सनातन धर्ममें गोत्रका बहुत महत्व है। गोत्रका शाब्दिक अर्थ तो बहुत व्यापक है। विद्वानोंने समय-समयपर इसकी यथोचित व्याख्या भी की है। गो अर्थात् इन्द्रियां, वहीं त्र से आशय है, रक्षा करना, अत: गोत्रका एक अर्थ इन्द्रिय आघातसे रक्षा करनेवाले भी होता है जिसका स्पष्ट संकेत ऋषिकी ओर है। सामान्यत: गोत्रको […]
Post Views: 787 अजीत रानाडे अमेरिकाके ३५वें राष्ट्रपतिके रूपमें पदभार ग्रहण करते हुए २० जनवरी, १९६१ को जॉन एफ केनेडीने यह प्रसिद्ध उक्ति कही थी, यह मत पूछें कि आपका देश आपके लिए क्या कर सकता है, आप यह पूछें कि आप अपने देशके लिए क्या कर सकते हैं। यह एक करिश्माई नेता द्वारा नागरिक […]
Post Views: 560 डा. प्रितम भि. गेडाम कोरोना महामारीने सम्पूर्ण विश्वको झकझोर कर रख दिया है, विश्वकी दूसरी सबसे ज्यादा आबादीवाले भारत जैसे विकासशील देशमें कोरोनाने देशकी अर्थव्यवस्था खराब कर दी। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि इस कोरोना महामारीने देशमें ३० हजारसे ज्यादा बच्चोंको अनाथ कर दिया है। सबसे ज्यादा नुकसान निम्न मध्यम वर्गके गरीब […]