Post Views: 14 ऋतुपर्ण दवे प्रकृति और मनुष्यके बीच दूरियां बढ़ती जा रही हैं। नतीजा सामने है, गर्मियोंमें बरसात, बरसातमें गर्मी और ठण्डमें पसीनेके अहसासके बावजूद हमारा नहीं चेतना एक बड़ी लापरवाही, बल्कि आपदाको खुद न्यौता देने जैसा है। सच तो यह है कि प्रकृतिकी अपनी प्राकृतिक वातानुकूलन प्रणाली है जो बुरी तरहसे प्रभावित हो […]
Post Views: 26 श्रीराम शर्मा यदि किसीका व्यवहार अनुचित प्रतीत होता है तो यह माननेसे पहले कि सारा दोष उसीका है, स्वयंपर भी विचार अवश्य करें। दूसरोंपर दोषारोपण करनेका आधा कारण तो स्वयं समाप्त हो जाता है। कई बार ऐसा भी होता है कि किसीकी छोटी-सी भूल या अस्त व्यस्ततापर आप मुस्करा देते हैं या […]
Post Views: 17 ओशो महावीरने कहा है जो तुम अपने लिए चाहते हो, वही दूसरोंके लिए भी चाहो और जो तुम अपने लिए नहीं चाहते, वह दूसरोंके लिए भी मत चाहो। तुम एक महल बनाना चाहते हो तो तुम चाहोगे कि दूसरा कोई एेसा महल न बना ले। यदि सभीके पास वैसे ही महल हों […]