पटना

फुलवारीशरीफ: विवादों के बीच इमारत-ए-शरिया के अमीर का चुनाव टला


      • नए अमीर ए शरीयत के चयन को लेकर अगली तारीख का एलान जल्द
      • अमीर ए शरीयत के चुनाव में इमारत परिसर में देर रात हालात संभालने पहुंचा जिला प्रशासन

फुलवारी शरीफ। बिहार झारखण्ड उड़ीसा के मुसलमानों की सबसे बड़ी एदारा ईमारत ए शरिया के नए अमीर ए शरीयत के चुनाव को लेकर चले आ रहे विवादों के भारी जद्दोजहद के बाद टाल दिया गया। इसके बारे में इमारत शरिया के तरफ से देर रात आधिकारिक बयान जारी किया गया है कि अमीर के चुनाव को अगले तारीख के इलान तक टाल दिया गया है। वहीं अमीर ए शरीयत के चुनाव में इमारत परिसर में देर रात हालात संभालने जिला प्रशासन को दखल देना ही पड़ा । कई प्राशनिक और पुलिस अधिकारियों की गाड़ियां देर रात तक इमारत में पहुंचती रही।

इससे पहले गुरुवार शाम तक इमारत शरिया से मिली खबरों में यह कहा गया था कि नए अमीर के चुनाव के लिये बिहार झारखण्ड बंगाल और उड़ीसा में 15 सेंटर बनाये गए हैं वहीं गुरुवार की देर रात इमारत शरिया के नए अमीर ए शरीयत का चुनाव टाल दिए जाने के एलान कर दिया गया।

इमारत ए शरिया बिहार,झारखंड,उड़ीसा और बंगाल में अमीर ए शरियत अध्यक्ष पद के लिए चुनाव का बिगूल बज चुका है और नामाकंन की प्रक्रिया भी गुरूवार से शुरू हो गई है। वहीं चुनाव को लेकर फतबा एवं बैठकों का दौड़ जारी है। इमारत ए शरिया विश्व भर में जानी मानी एक संस्था है। अमीर के चुनाव के साथ ही चार राज्याें में चुनाव को लेकर उल्लेमाओं में काफी हलचल बढ़ गई है।  इस गहमागहमी के बीच फुलवारी शरीफ शहर में कई स्थानाें पर बैठक हुई।

अमीर के चुनाव को लेकर अब तब तीन गुट हो गया है। एक गुट बिना चुनाव के ही अमीर को नियुक्त करने पर हाथ पांव मार रहा है जब कि दूसरा गुट चाहता है कि 15 स्थानों पर चुनाव ना करा एक ही स्थान इमारत ए शरिया में ही चुनाव कराया जाये जब कि तीसरा गुट पूरी तरह से कोरोना नियमों का पालन करते 15 स्थानों पर चुनाव कराकर मतों की गिनती कराना चाहता है। इस गुट का मानना है कि कोरोना को देखते हुए भीड़ से बच कर चुनाव कराया जाये।

इस्लाम को मानने वालों को ओहदा या पद की मांग करना जायज नही माना जाता है। ये बातें  गुरूवार को फुलवारी शरीफ में हुई एक बैठक में खानकाह मुंगेर के कारी मौलाना आरीफ रहमानी ने फतबा जारी करते हुए कहा। उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति किसी पद की मांग करने लगे तो उसे पद नहीं दिया जाये। शरियत में पद की मांग कराना नाजायज है। उन्होंने कहा कि इमारत ए शरिया के अमीर के चुनाव में अमीर पद का कोई उम्मीदवार नामांकन नहीं करेगा बल्कि उम्मीदवार के चाहने वाले उनके नाम का नामांकन करेंगे।

बता दें की मौलाना वली रहमानी साहब के कोरोना से निधन के बाद से ही इमारत शरिया के नए  अमीर ए शरीयत को लेकर ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है। नायाब अमीर ए शरीयत मौलाना शमशाद रहमानी के नेतृत्व में नए अमीर ए शरीयत की नियुक्ति होनी थी। इसके लिए जानकारों का कहना है कि तीन माह का ही समय नायब अमीर ए शरीयत के पास रहता है जो वक्त गुजर गया। वहीं वर्तमान में हालात यह है कि कई गुट नए अमीर के चुनाव के लिये मैदान में जोर आजमाइश कर रहे हैं।

कोई गुट का मानना है कि अमीर ए शरीयत का चुनाव न होकर सर्वसम्मति से किसी आलिमे दिन हजरात को अमीर बनाया जाय। वही कोई गुट यह मान कर चुनाव कराने पर काम कर रहे हैं कि कई दावेदार नए अमीर ए शरीयत के पद की दौड़ में शामिल है और सभी आलिमे दीन है । ऐसे में चुनाव ही सही विकल्प हो सकता है। साथ ही किसी गुट का यह भी मानना है कि शरीयत में इसकी सख्त मनाही है कि कोई ओहदा की मांग करे। ओहदा की मांग शरीयतन जायज नही है। बहरहाल कई गुटों की रस्साकसी को देख अमीर के चुनाव की सारी कोशिशें थम सी गयी है।

अब देखना दिलचस्प होगा कि तीन तीन राज्यों के मुसलमानों की सबसे बड़ी एदारा  इमारत शरिया के अमीरे शरियत के पद पर कौन चुने जाते हैं। वहीं सर्व वर्गीय धार्मिक विद्वानों का मानना है कि इमारत शरिया का पूरी दुनिया मे अलग पहचान है उसके इतिहास को सरवोपरि मानकर जल्द से जल्द नए अमीर ए शरीयत का चुनाव हो जाना चाहिए।