पटना

राजगीर: नाम नेचर सफारी और है नेचुरल


सीएम नीतीश ने 19.29 करोड़ की लागत से बने राजगीर नेचर सफारी का किया लोकार्पण

(डॉ॰ कौशलेन्द्र)

राजगीर (आससे)। नाम है नेचर सफारी और है यह नेचुरल। यह प्रकृति की गोद में बसा है। यह आकर्षण का केंद्र है और अपने आप में इतिहास भी समेट रखा है। युवाओं एवं नई पीढ़ी या कहे यंग जेनरेशन के लोगों को यहां से जोड़ना है ताकि लोग पर्यावरण के प्रति सजग हो और अपने इतिहास के प्रति आकर्षित हो सके। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राजगीर में नेचर सफारी के उद्घाटन के पश्चात मीडिया से बातचीत करते हुए उक्त बातें कहीं।

उन्होंने कहा कि बिहार में ईको-टूरिज्म को बढ़ावा दिया जा रहा है। राजगीर के घोड़ाकटोरा के बाद नेचर सफारी भी ईको-टूरिज्म का हिस्सा है। इसके साथ ही पटना, गया, बोधगया, वैशाली और बांका में भी ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देने पर काम चल रहा है। बिहार में पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए लगातार काम होता रहा है। इसी का नतीजा है कि कोरोना काल को छोड़ दे तो बिहार में दो करोड़ से अधिक देसी और 10 लाख से अधिक विदेशी पर्यटक घूमने आ रहे है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राजगीर में 19 करोड़ 29 लाख 15 हजार की लागत से बने नेचर सफारी का शुभारंभ किया। अलग-अलग भागों में विभक्त इस नेचर सफारी के अलग-अलग अवयवों का सीएम ने शुभारंभ किया और देखा भी। उन्होंने कहा कि राजगीर में जू सफारी बनाने पर विचार चल रहा था। इसी  क्रम में जब जू सफारी का हिस्सा देखने आया तो राजगीर की नेचर को देखकर मुझे यहां नेचर सफारी बनाने की बात समझ में आयी। पांच पहाड़ियों के बीच घिरी राजगीर कभी मगध की राजधानी भी रही। ऐसे में यहां नेचर सफारी का निर्माण अपने आप में महत्व रखता है। उन्होंने कहा कि तीन वर्षों में इसपर काम पूरा होगा। दो माह पूर्व भी आकर इसे देखा था।

मुख्यमंत्री ने आज एक बार फिर कहा कि नेचर सफारी एवं राजगीर आने वाले पर्यटकों की सुरक्षा का पूरी व्यवस्था की गयी है, लेकिन नेचर सफारी सिर्फ दिन का हिस्सा होगा। रात को यह पर्यटकों के लिए नहीं खुलेगा। उन्होंने बताया कि नेचर सफारी में आने वाले लागों को लौटने के वक्त उन्हें उनकी तस्वीर दी जायेगी ताकि वो याद रख सके कि उन्होंने नेचर सफारी देखा है।

सीएम ने सस्पेंशन ब्रिज, ग्लास स्कई वाक, जिप लाइन, जिप लाइन साइकिल आदि का शुभारंभ किया और एडवेंचर को भी देखा। बाद में कैफैटेरिया में ब्रेकफास्ट भी लिया और मीडिया से बात की। इस बीच सीएम कई बार पैदल तो कई बार बैटरी चालित गाड़ी से नेचर सफारी के विभिन्न हिस्सों को देखा। सीएम ने बताया कि यह नेचर सफारी लगभग 8 किलोमीटर क्षेत्र का है। ऐसे में पर्यटक चाहे तो पैदल या फिर किराया पर साइकिल लेकर इसका भ्रमण कर सकते है।

उन्होंने बताया कि 2009 में उन्होंने राजगीर में एक सप्ताह का प्रवास किया था और इसी दौरान राजगीर के विभिन्न क्षेत्रों को देखा था और तब से लगातार यहां के इतिहास, पर्यावरण आदि को ध्यान में रखकर पैटर्न को बढ़ावा दिया जा रहा है। उस वक्त से हीं उजड़ रहे राजगीर के पहाड़ और जंगलों में वृक्ष लगवाना शुरू किया, जो आज बड़ा होता दिख रहा है।

मुख्यमंत्री के साथ उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद के अलावे पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री नीरज कुमार सिंह, ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार, नालंदा सांसद कौशलेंद्र कुमार, राजगीर विधायक कौशल किशोर के अलावे मुख्यमंत्री के मुख्य सचिव दीपक कुमार, प्रधान सचिव चंचल कुमार, सचिव मनीष कुमार वर्मा, सचिव अनुपम कुमार, बिहार के डीजीपी एसके सिंघल, पटना के प्रमंडलीय आयुक्त संजय अग्रवाल, नालंदा के जिलाधिकारी योगेंद्र सिंह, पुलिस अधीक्षक एस- हरि प्रसाथ के अलावे विभिन्न विभागों के पदाधिकारी उपस्थित थे।

इसके पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हेलीकॉप्टर से राजगीर पहुंचे और फिर स्वर्ण भंडार के पास से जू सफारी एवं नेचर सफारी घूमने के लिए वन विभाग द्वारा लाये गये एसी वैन में बैठकर राजगीर जंगल स्थित नेचर सफारी पहुंचे। मुख्यमंत्री नेचर सफारी पहुंचकर वहां उद्घाटन के क्रम में ही ग्लास स्काई वॉक, ससपेंशन ब्रिज, जिप लाइन, फ्रलाइंग फॉक्स, जिप स्काई वॉकिंग, वॉल क्लाइंबिंग को देखा। मुख्यमंत्री द्वारा बेहतर काम करने वाले वन विभाग के कर्मियों को यहां सम्मानित भी किया गया।