सम्पादकीय

सैनिकोंका उत्साहवर्धन


चीनके साथ तनावके बीच थल सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणेने पूर्वी लद्दाखमें ऊंचाइयोंपर स्थित विभिन्न अग्रिम चौकियोंका बुधवारको न केवल दौरा किया, अपितु कड़केकी ठण्डका सामना कर रहे भारतीय सैनिकोंका उत्साहवर्धन भी किया। विगत सात महीनेसे क्षेत्रमें चीनके साथ जारी गतिरोधके बीच जनरल नरवणेका यह दौरा काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि चीन कभी भी कोई प्रतिकूल स्थिति उत्पन्न कर सकता है। उन्होंने रेचिन ला सहित अग्रिम चौकियों और लद्दाखसे लगी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) का स्वयं आकलन किया और जवानोंको सन्देश दिया कि वे उच्चतम स्तरपर सतर्कता बनाये रखें और हर चुनौतीका सामना करनेके लिए तैयार भी रहें। पूर्वी लद्दाखके विभिन्न ठिकानोंपर इस समय ५० हजार जवानोंको लड़ाईके लिए तैयार अवस्थामें तैनात किया गया है। चीनने भी इतनी ही संख्यामें अपने जवानोंकी तैनाती की है। इस इलाकोंका तापमान शून्यसे काफी नीचे है, जहां चीनी सैनिकोंके हौसले पस्त हो गये हैं, जबकि भारतीय सैनिक पूरे जोशके साथ पूरी तरह सक्रिय हैं। लगभग साढ़े तीन माह पूर्व भारतीय जवान पैंगोंग झीलके दक्षिण किनारेपर रणनीतिक दृष्टिïसे महत्वपूर्ण मुखपरी, रेचिन ला, मगर हिल क्षेत्रके ऊंचाईवाले स्थानोंपर काबिज हो गये थे। भारतीय सेनाने यह काररवाई चीनकी धमकीकी कोशिशके बाद की। गत पांच मईको पैंगोंग झील इलाकेमें हिंसक झड़पके बादसे ही गतिरोध बना हुआ है। इसे दूर करनेके लिए सैन्य कमाण्डरोंके स्तरपर कई दौरकी वार्ता हुई और कूूटनीतिक स्तरपर भी प्रयास किये गये लेकिन चीनका रवैया उचित नहीं रहा जिससे न केवल गतिरोध बना हुआ है अपितु चीनकी ओरसे गलत हरकतें भी की जा रही हैं। चीनकी कथनी और करनीमें काफी अन्तर है और उसकी विश्वसनीयता भी समाप्त हो गयी है। भारतकी मजबूत तैयारीसे चीनके हौसले पस्त हैं। भारतीय सेनाके पराक्रम और शौर्यका अनुमान उसे गलवान घाटीमें ही लग चुका है, जहां बीस भारतीय सैनिकोंकी शहादतका बदला चीनपर काफी भारी पड़ गया था। लगभग ५० से अधिक चीनी सैनिक मारे गये थे। भारतकी सैन्य शक्ति भी काफी बढ़ चुकी है और चीन यह भी जानता है कि विश्वके अनेक शक्तिशाली राष्टï्र भारतके साथ मजबूतीसे खड़े हैं। ऐसी स्थितिमें युद्ध करना चीनके लिए काफी भारी पड़ जायगा। जनरल नरवणेके दौरेसे चीनको भी मजबूत सन्देश गया है। इसलिए वह जल्दबाजीमें कोई दुस्साहस नहीं करेगा।
मनरेगा मजदूरोंकी सुधि
उत्तर प्रदेशकी योगी आदित्यनाथकी सरकारने मनरेगा मजदूरोंके हितमें बड़ा फैसला लिया है। निर्माण श्रमिकोंके कल्याणके लिए प्रदेशमें चलायी जा रही १५ योजनाओंका लाभ महात्मा गांधी राष्टï्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी अधिनियम (मनरेगा) मजदूरोंको भी देनेका महत्वपूर्ण निर्णय सरकारने किया है। मनरेगा मजदूरोंको अब आवास, शौचालय, पेंशन और चिकित्सा जैसी सुविधा मिलेगी। हालांकि इसका लाभ उन मनरेगा मजदूरोंको ही मिलेगा, जिन्होंने एक सालमें न्यूनतम ९० दिन मनरेगाके तहत काम किया होगा। सरकारके इस फैसलेसे प्रदेशके लाखों श्रमिक लाभान्वित होंगे। कोरोना संकटके दौरान देशके अन्य राज्योंसे वापस लौटे श्रमिकोंको उनके गांव और कस्बोंके पास रोजगार देनेकी उत्तर प्रदेश सरकारने जो मुहिम चलायी उससे गांवोंके विकासका मार्ग प्रशस्त हुआ वहीं नये वर्षमें उत्तर प्रदेश मनरेगा योजनामें सबसे अधिक रोजगार मुहैया करानेवाला राज्य बन जायगा। सरकारने ३१ मार्चतक बीस लाख परिवारोंको सौ दिनका काम देनेका लक्ष्य निर्धारित किया है, जबकि बीस लाख मजदूर मनरेगाके तहत विभिन्न कामोंमें लगे हुए हैं। इस वित्तीय वर्षमें अभीतक १.३२ लाख जाबकार्ड धारक परिवारोंने पूरे सौ दिनका काम कर लिया है। देशमें हुए लाकडाउनके दौरान सबसे अधिक प्रभावित श्रमिक हुए। बेकारीके संत्राससे उन्हें मुक्त करानेमें उत्तर प्रदेशने अनुकरणीय कदम उठाये हैं। उनको जहां आर्थिक सहायता प्रदान की गयी वहीं उन्हें रोजगारसे जोड़कर उनके उत्थानके लिए लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। उनको उनके ही गांव और कस्बोंमें काम मिलनेसे परिवारके बीच रहकर जीवनयापनकी उनकी तमन्ना पूरी करनेमें प्रदेश सरकारने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है। अब उनको आवास, शौचालय, पेंशन और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराकर उनके जीवन स्तरको बेहतर बनानेका काम किया है। उत्तर प्रदेश सरकारने मजदूरोंके उत्थानके लिए जिस तरह उनकी सुधि ली है, वह स्वागतयोग्य और अन्य राज्योंके लिए अनुकरणीय है।