नदियों की गाद से बनेंगी सड़कें, बिहार में बाढ़ का खतरा होगा कम
आज समाचार सेवा-
नयी दिल्ली, 3 नवंबर। बिहार की नदियों में जमा गाद अब विकास का संसाधन बनेगी। 'नदी संजीवनी' कार्यक्रम के तहत मंगलवार को केंद्र सरकार और बिहार सरकार के बीच नदियों से गाद निकालने और उसका उपयोग राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण में करने को लेकर समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की मौजूदगी में हुए इस समझौते के तहत 243 लाख घनमीटर गाद का उपयोग 16 राजमार्ग परियोजनाओं में किया जाएगा।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस पहल के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि बिहार देश का पहला राज्य है, जिसने जलस्रोत पुनरुद्धार एवं गाद प्रबंधन नीति-2026 लागू की है। नदियों से गाद निकालने से उनकी जलधारण क्षमता बढ़ेगी, बाढ़ का प्रभाव कम होगा और किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। साथ ही सड़क निर्माण में प्राकृतिक मिट्टी के इस्तेमाल पर भी अंकुश लगेगा।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि महाराष्ट्र के सफल बुलढाणा मॉडल की तर्ज पर बिहार में गाद निकासी का काम किया जाएगा। इससे जल संरक्षण और नदी पुनर्जीवन को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस परियोजना से बिहार सरकार पर कोई वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नेपाल में भारी बारिश और दूसरे राज्यों से आने वाले पानी के कारण बिहार हर साल बाढ़ की समस्या झेलता है। फरक्का बैराज के कारण गंगा में गाद जमा होने की समस्या भी गंभीर है। उन्होंने कहा कि बिहार बांग्लादेश को पानी देने का विरोधी नहीं है, लेकिन राज्य की कृषि, उद्योग और पेयजल संबंधी जरूरतों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। फिलहाल बिहार को जुलाई से अक्टूबर तक ही गंगाजल के उपयोग का अवसर मिलता है। उन्होंने गंगा के दोनों किनारों पर फोरलेन सड़क बनाने का भी आग्रह किया।
मुख्यमंत्री के अनुसार, गाद निकासी से लगभग एक लाख एकड़ नई भूमि उपलब्ध होने की संभावना है। इसका उपयोग गंगा किनारे आवासीय कॉलोनियां विकसित करने में किया जा सकता है। राज्य में 80 हजार एकड़ भूमि पर 12 नए टाउनशिप, 10 हवाई अड्डे और 32 मेडिकल कॉलेज विकसित किए जा रहे हैं। इन परियोजनाओं में भी गाद का उपयोग किया जाएगा।
बिहार में एनएचएआई की 58,340 करोड़ रुपये की लागत वाली 39 परियोजनाएं (1,561 किलोमीटर) निर्माणाधीन हैं, जबकि 1,85,200 करोड़ रुपये की लागत से 11 नई परियोजनाएं (1,982 किलोमीटर) प्रस्तावित हैं। इसके अलावा विभिन्न नदियों पर 29 नए पुल बनाए जा रहे हैं। समझौते के तहत एनएचएआई को जरूरत के अनुसार गाद उपलब्ध कराने के लिए बिहार सरकार नियमानुसार खनन लाइसेंस में सहयोग करेगी।
इस अवसर पर बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव वी. उमाशंकर और एनएचएआई अध्यक्ष संतोष कुमार यादव सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
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