Post Views: 909 जग्गी वासुदेव यदि कोई जीवनको ही नहीं समझता तो वह यह कैसे समझ सकता है कि मृत्यु क्या है। अभी तो जीवित हैं परन्तु यदि यह नहीं समझ पाते कि आप कहां हैं तो फिर उस बातको कैसे समझ पायंगे जो अभी होना बाकी है। मृत्यु जैसा कुछ भी नहीं है। यहां […]
Post Views: 963 हृदयनारायण दीक्षित प्रकृति सदासे है। परिवर्तनशील है। अखंड सौभाग्यवती भी है। प्रकृतिका एक-एक अंश गतिशील है। प्रकृतिके अणु और परमाणु न केवल गतिशील है, बल्कि नाच रहे हैं। ऋग्वेदमें सृष्टिके उद्भवका सुंदर उल्लेख है। चौमासाके चार माह व्रत उपासनाका सुंदर अवसर है। विद्वानोंने १२ महीनोंमेंसे चार महीनेका दायित्व, कर्तव्य और आनन्दको एक […]
Post Views: 569 अवधेश कुमार पश्चिम बंगालमें ममताकी राजनीतिने माकपा नेतृत्ववाले वामदलों ऐसा ढहाया कि वामपंथी अबतक कराह रहे हैं। भाजपाको भी लगता है कि वह २०११ में ममताकी विजय सदृश कारनामा कर सकते हैं। तृणमूल कांग्रेसके नेताओंका भाजपामें प्रवेश प्रक्रिया लगातार बढ़ रही है। बंगालके राजनीतिक परिदृश्यके संकेतोंको कैसे पढ़ा जाय। कुल २९४ विधानसभा […]