Post Views: 978 मोहन गुरुस्वामी राष्ट्र वास्तवमें कभी असफल नहीं होते, भले उनपर दखल कर लिया जाता है, उनका विलय हो जाता है, वे पीछे चले जाते हैं या कभी-कभी गायब भी हो जाते हैं। राज्य यानी शासन तंत्र ही विफल होते हैं। इस मामलेमें भ्रम इसलिए रहता है कि हम राज्य और राष्ट्रका प्रयोग […]
Post Views: 683 कोरोना महामारीके खिलाफ जंगमें निरन्तर सफलता मिलना अत्यन्त ही सुखद और राहतकारी है। दूसरी लहर अब नियंत्रणमें आ गयी है। जहां एक ओर नये संक्रमितोंकी संख्या कम हो रही है वहीं मृतकोंके आंकड़ेमें भी उल्लेखनीय गिरावट आयी है और ठीक होनेवालोंकी संख्यामें तेजीसे वृद्धि हुई है। रविवारको केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालयकी ओरसे जारी […]
Post Views: 777 हृदयनारायण दीक्षित प्रतीक्षा अस्तित्वपर विश्वास है। वर्तमान परिस्थितिसे प्राय: सभी पीडि़त-व्यथित रहते हैं। अच्छे दिन आनेकी पुलक होती है। प्रकृति जड़ नहीं है। प्रकृतिका प्रत्येक अंश गतिशील है। यह गतिशीलता ऋजु- सीधा मार्ग नहीं अपनाती। यह चक्रीय है। पूर्वजोंने संभवत: इसीलिए कालगतिके प्रतीकको चक्र कहा है। इस चक्रीय गतिका अंत एवं प्रारम्भ […]