Post Views: 1,037 डा. भरत झुनझुनवाला आगामी वर्षके बजटमें वित्तमंत्रीने एक महत्वपूर्ण घोषणा यह की है कि दो सार्वजनिक बैंकोंका निजीकरण किया जायगा। अबतक सरकारकी नीति सरकारी कम्पनियोंके आंशिक शेयरोंको बेचनेकी रही है। इस प्रकारके विनिवेशसे कम्पनियोंपर नियन्त्रण एवं उनके प्रबंधनकी जिम्मेदारी सरकारी अधिकारियोंकी ही रहती है। इसके विपरीत निजीकरणमें सरकारी इकाईके कंट्रोलिंग शेयर किसी […]
Post Views: 877 श्रीश्री रवि शंकर शिव कोई व्यक्ति या शरीर नहीं है। शिव शाश्वत तत्व है, जो सब तत्वोंका सार है। यह वह मूल तत्व है, जिससे प्रत्येककी उत्पत्ति एवं पालन होता है और इसीमें विलीन हो जाता है। इस अति सूक्ष्म एवं अप्रत्यक्ष तत्वको कोई कैसे समझा सकता है। नटराज अथवा ब्रह्मïांडके नर्तकके […]
Post Views: 648 प्रो. संजय द्विवेदी यह एक ऐसे देशकी कहानी है, जो अपनी १३५ करोड़ जनताके साथ कोरोनाके विरुद्ध जंग लड़ रहा है। सरकारों और निजी अस्पतालोंको मिलाकर भी चिकित्साके इंतजाम कम पड़ गये हैं। आक्सीजनकी कमीके चलते हाहाकार है। जरूरी चीजों, खाद्य पदार्थों, दवाओंकी कालाबाजारीमें हमारा कोई सानी नहीं है। हालात बदसे बदतर […]