Post Views: 907 हृदयनारायण दीक्षित मानवीय सृजन कर्मका सबसे बड़ा फल है भाषा। भाषा अद्भुत लब्धि है। वाणीके जन्मका इतिहास बहुत प्राचीन है। ऐतरेय उपषिदमें कहते हैं, सबसे पहले हिरण्यगर्भ था। इससे मुख छिद्र बना। मुखसे वाणी निकली। वाणीका रस बड़ा प्यारा है। ‘बतरसÓ का आनन्द ही कुछ और है। हम सब जीवनका अधिकांश भाग […]
Post Views: 620 प्रताप सिंह विश्वभरमें मौतका कहर मचानेवाली कोरोना महामारीके भयंकर एवं डरावने माहौलमें कोरोना संक्रमणके चक्रव्यूहमें अपनी जानकी परवाह किये बिना बेखौफ होकर घुसनेका साहस यदि किसीने किया तो वह अग्रदूत हमारे डाक्टर हैं। कोरोनासे उपजी लाकडाउन जैसी बंदिशोंमें भी चिकित्साकर्मी कोरोना संक्रमित मरीजोंके इलाजमें मुस्तैद थे। आजके आधुनिक दौरमें कई बीमारियोंका पता […]
Post Views: 567 अनिल त्रिगुणायत नेपाल में कई वर्षोंसे राजनीतिक अस्थिरताकी स्थिति है, विशेष रूपसे २०१५ के संविधानके लागू होनेके बादसे। उसके बाद हुए चुनावमें कुछ अन्य पार्टियोंके समर्थनके साथ सबसे बड़ी पार्टीके मुखिया होनेके नाते के.पी. ओली प्रधान मंत्री बने। बादमें प्रचंडकी पार्टीके विलयके समय तय हुआ कि आधे कार्यकालतक ओली और शेष अवधिमें […]