Post Views: 1,006 अशोक सावनके महीनेमें प्रत्येक शिवभक्तकी यही कामना होती है कि एक बार बाबा बैद्यनाथका दर्शन जरूर कर ले। कहते हैं सागरसे मिलनेका जो संकल्प गंगाका है वही दृढ़निश्चय भगवान शिवसे मिलनेका कांवडिय़ोंमें भी देखा जाता है। तभी तो श्रावणी मेलके दौरान धूप, बारिश और भूख-प्यास भूलकर दुर्गम रास्तोंपर दुख उठाकर अपने दुखोंके […]
Post Views: 1,137 ऋतुपर्ण दवे क्या किसान मजबूर है और खेती मजबूरी। यह प्रश्न बहुत ही अहम हो गया है। अब लग रहा है कि किसानोंकी स्थिति ‘उगलत लीलत पीर घनेरीÓ जैसे हो गयी है। बदले हुए परिवेश यानी सामाजिक एवं राजनीतिक दोनोंमें किसानोंकी हैसियत और रुतबा घटा है। किसान अन्नदाता जरूर है लेकिन उसकी […]
Post Views: 642 आर.डी. सत्येन्द्र कुमार यदि अन्तरराष्टï्रीय श्रम संघटनकी मानें तो महामारीके चलते विश्व श्रम बाजारकी हालत काफी खस्ता हुई है। इस स्थितिमें तत्काल शीघ्र सुधारके भी आसार नजर नहीं आ रहे हैं। यह सच है कि श्रम बाजारकी इस दुर्गतिके लिए केवल कोरोनाजनित महामारी ही जिम्मेदारी नहीं है। उसके लिए अन्य कई कारण […]