सम्पादकीय

कोरोनाकी भयावह स्थिति


डा. गौरीशंकर राजहंस   

एम्सके प्रसिद्ध डाक्टरने कहा है कि आजादीके बाद भारतकी इतनी दयनीय स्थिति पहले कभी नहीं हुई थी। प्रतिदिन लाखों लोग इस बीमारीसे संक्रमित हो रहे हैं। गत २४ घंटेमें पूरे देशमें तीन लाख ८० हजारके ज्यादा लोग इस बीमारीसे संक्रमित हो गये और हजारों संक्रमित मरीजोंकी अकाल मृत्यु हो गयी। सबसे दुखद स्थिति तो यह है कि अधिकतर मरीज आक्सीजन और वैक्सीनके अभावमें मरते जा रहे हैं। यह भी नहीं पता लग रहा है कि सरकारके लाख प्रयासके बावजूद आक्सीजनकी कमी कब पूरी होगी और कब लोग तड़प-तड़प कर मरनेसे बचेंगे? विभिन्न टीवी चैनलोंपर मरीजोंकी जो दयनीय स्थिति दिखाई देती है वह अत्यन्त ही हृदयविदारक है। यह सच है कि किसीने भी इस बातकी कल्पना नहीं की थी कि कोरोनाकी दूसरी लहरमें भारतकी यह दयनीय स्थिति हो जायगी। एक ही संतोषका विषय है कि संसारके अधिकतर देश विपत्तिकी इस घड़ीमें भारतकी मदद करनेके लिए आगे आ रहे हैं। ब्रिटेन, अमेरिका, रूस, फ्रांस और जर्मनी आदि देश तो हर तरहकी मदद करनेको तैयार हैं। सिंगापुर, मलयेशिया तथा अन्य पड़ोसी देश भी भारतको हवाई जहाजसे आक्सीजनकी सप्लाई कर रहे हैं। परन्तु विशाल जनसंख्या होनेके कारण भारतकी आक्सीजनकी मांग इतनी अधिक है कि निकट भविष्यमें इसकी आपूर्ति सामान्य होना संभव नहीं है।

जब यह बीमारी शुरू हुई तब अमेरिकाने कहा था कि वह सबसे पहले अमेरिकाके नागरिकोंको इस बीमारीसे लडऩेके लिए आक्सीजन देगा। परन्तु अमेरिकामें रहनेवाले भारतीय मूलके लोगोंकी संख्या बहुत अधिक है और उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेनपर दबाव बनाया कि विपत्तिकी इस घड़ीमें भारतको हरसंभव मदद दी जानी चाहिए। उन्होंने इस बातको भी याद दिलाया कि जब कोरोनाकी पहली लहर शुरू हुई थी तब भारतने अमेरिकाको अपने यहांसे दवाईयां भेजकर हरसंभव मदद की थी। अब अमेरिकाके राष्ट्रपतिने भारतीय मूलके लेागोंके दबावमें आकर अपनी नीतिमें परिवर्तन किया है और कहा है कि अमेरिका हरसंभव भारतकी मदद करेगा। अमेरिका बड़े पैमानेपर वैक्सीनके कच्चे मालकी आपूर्ति भारतको कर रहा है। प्रधान मंत्री मोदीने इस सिलसिलेमें अमेरिकी राष्ट्रपतिसे विस्तारसे बात की है। अमेरिकाके राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारने भारतके अपने समकक्ष अजित डोबालसे बात कर आश्वस्त किया है कि अमेरिका वैक्सीनका कच्चा माल भरपूर मात्रामें भारतको सप्लाई करता रहेगा। भारतके लिए यह एक अत्यन्त ही संतोषका विषय है।

कोरोनाकी स्थितिपर भारतके प्रधान मंत्री मोदीने रूसके राष्ट्रपति पुतिनसे कोरोनासे उत्पन्न स्थितिपर चर्चा की। विश्वस्त सूत्रोंका कहना है कि रूस भारतका पुराना मित्र है और इस बीच नरेन्द्र मोदीने रूसके साथ अपने संबंधोंको बहुत मजबूत किया है। रूसने नरेन्द्र मोदीको आश्वस्त किया है कि संकटकी इस घडीमें रूस भारतके साथ खड़ा रहेगा और भारतको हरसंभव सहयोग देगा। कोरोनासे छुटकारा पानेके लिए जो वैक्सीन तैयार की जा रही है उसके लिए रूस भारतको कच्चा माल सप्लाई करेगा। इसी तरह दुनियाके अन्य देशोंने भी भारतको विपत्तिकी इस घड़ीमें मदद करनेकी पहल की है।

यह सच है कि भारत सहित संसारके किसी वैज्ञानिकने यह कल्पना नहीं की थी कि कोरोनाकी दूसरी लहरमें भारत इस तरह तबाह हो जायगा। अब तो ऐसी खबर आ रही हैं कि इस बीमारीका वायरस अन्य देशोंमें भी तेजीसे फैल रहा है। हालमें यह खबर आयी कि ऐसे देश जहां कोरोनाका नामोनिशानतक नहीं था वहां भी यह वायरस पहुंच रहा है। स्थिति अत्यन्त ही जटिल और गंभीर है। भारतमें और भारतके बाहर किसीको समझमें नहीं आ रहा है कि इस वायरससे कब और कैसे छुटकारा मिलेगा। इस संदर्भमें हर भारतीयको प्रधान मंत्री मोदीकी सलाह माननी चाहिए और घरके अन्दर और बाहर मास्क पहने रखना चाहिए तथा दो गजकी दूरी बनाये रखनी चाहिए और यदि आवश्यक न हो तो घरसे बाहर नहीं निकलना चाहिये। जब कोरोनाकी पहली लहर आयी थी तब बच्चोंको कोई खतरा नहीं था। परन्तु आजकी तारीखमें भारत और विदेशोंमें भी बच्चे और नवयुक कोरोनासे संक्रमित हो रहे हैं। डाक्टर यह नहीं समझ पा रहे हैं कि कोरोनासे पीडि़त इन बच्चोंका इलाज किस प्रकार किया जाय। सबसे अधिक आवश्यकता इस बात है कि हर व्यक्ति अपनी और अपने परिवारके अन्य लोगोंकी सुरक्षाके लिए सरकार द्वारा समय-समयपर जारी गाइडलाइनका पालन करें। क्योंकि निकट भविष्यमें इस महामारीका कोई सही इलाज नजर नहीं आ रहा है। ऐसेमें हर तरहकी सुरक्षा और समाजिक दूरी बनाये रखनेसे अपने आपको बचाया जा सकता है। लोग ठीक कह रहे हैं कि विपत्तिकी इस घड़ीमें भगवानसे प्रार्थना की जाय कि वह भारत और दुनियाको शीघ्रातिशीघ्र इस विपत्तिसे मुक्ति दिलायें।