सम्पादकीय

गणतंत्र और चुनौतियां


अनेक चुनौतियों और विषम परिस्थितियोंके बीच आज पूरा देश भारतीय गणतंत्र दिवसका ७२वां उत्सव मना रहा है। देश और विदेशोंमें प्रवास कर रहे भारतीय हर्ष और उल्लासके साथ इस उत्सवमें सहभागिता कर रहे हैं। स्वतन्त्र भारतके इतिहासमें यह पहला अवसर है जब कोरोना वैश्विक महामारीकी चुनौतियोंका सामना करते हुए हम पूरे जोश और उत्साहके साथ गणतन्त्र महोत्सवके साक्षी बन रहे हैं। महामारीके कारण इस उत्सवका स्वरूप भी कुछ अलग है। इस बार मुख्य समारोहमें मुख्य अतिथि भी उपस्थित नहीं हो सके, जबकि ब्रिटेनके प्रधान मंत्री बोरिस जानसनने समारोहमें उपस्थित होनेकी स्वीकृति प्रदान की थी लेकिन ब्रिटेनमें कोरोनाका भयावह स्वरूप सामने आनेसे उन्होंने अपना कार्यक्रम रद कर दिया। भारतमें भी कोरोना वायरससे एक करोड़ छह लाखसे अधिक लोग संक्रमित हुए, जिनमें एक लाख ५३ हजारसे अधिक लोगोंकी मृत्यु हो गयी। कोरोनाके खिलाफ भारतने मजबूत जंगमें उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की, जिससे भारतमें विश्वके अन्य देशोंकी तुलनामें संक्रमितों और मृतकोंकी संख्या कम औैर कोरोनाको परास्त कर स्वस्थ होनेवालोंकी संख्या अधिक रही। कोरोनाका सुरक्षित और भरोसेमंद टीका विकसित करना भारतकी बड़ी उपलब्धि है। साथ ही विश्वका सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान चलाकर भारतने एक मिसाल भी प्रस्तुत की है। विदेशोंसे भारतीय टीकोंकी मांग बढ़ी है जो भारतके लिए हर्षका विषय है। भारत अपने देशकी जनताकी रक्षा करनेके साथ ही अन्य देशोंकी जनताकी भी कोरोनासे रक्षा करनेमें योगदान कर रहा है। मानवताकी यह राष्टï्रकी बड़ी सेवा है। इससे पूरे विश्वमें भारतकी प्रतिष्ठïा और साख बढ़ी है। यह राष्टï्रके लिए गर्व और गौरवका विषय है। कोरोनाके खिलाफ जंगमें गण और तंत्र दोनोंने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी और इसका क्रम बना हुआ है। कोरोनाको समूल समाप्त करनेका संकल्प साकार होनेकी ओर अग्रसर है। अनेक कोरोना योद्धाओंने अपने प्राणोंकी आहुति देकर पीडि़तोंकी प्राणरक्षामें अतुलनीय योगदान किया है। पूरा राष्टï्र उनके बलिदानके प्रति कृतज्ञ है। कोरोना कालमें देश और समाजपर भी काफी प्रभाव पड़ा है। जीवनशैली और व्यवस्थाओंमें नये बदलाव आये हैं। साथ ही चुनौतियोंसे जूझनेकी मजबूत प्रवृत्ति भी विकसित हुई है। गण और तंत्र दोनोंकी क्षमता और कौशलमें पर्याप्त संवर्धन हुआ है।
गणतंत्र दिवसका राष्टï्रीय पर्व २६ जनवरी, १९५० को भारतीय संविधान लागू होनेके सन्दर्भमें प्रति वर्ष मनाया जाता है। संविधान निर्माताओंने विश्वके प्रमुख संविधानोंका गहन अध्ययन और मनन करनेके उपरान्त भारतीय संविधानको बनाया था। भारतीय संविधानकी गणना विश्वके श्रेष्ठïतम संविधानोंमें होती है, जिसका हमें गर्व है। आवश्यकता पडऩेपर समय-समयपर इसमें संशोधन भी किये गये, जो इसके लचीले स्वरूपका परिचायक है। भारतीय संविधान राष्टï्रधर्मका पवित्र गं्रथ है। हर भारतीय नागरिकके लिए यह परम सम्माननीय है। इसका सम्मान करना सरकार और जनताका श्रेष्ठï कर्तव्य है लेकिन कुछ दिग्भ्रमित और स्वार्थी तत्व संविधानकी मर्यादाओंका उल्लंघन करनेका दुस्साहस करते हैं, जो निन्दनीय और राष्टï्रविरोधी कृत्य है। भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्थामें गण और तंत्रका विशेष महत्व है और दोनों एक-दूसरेके पूरक हैं। साथ ही दोनों एक-दूसरेको प्रभावित भी करते हैं। गण और तंत्र यदि संविधानसम्मत कार्य करें तो किसी भी चुनौतीका सफलतापूर्वक सामना किया जा सकता है। लोकतांत्रिक व्यवस्थामें चुनौतियां समय-समयपर आती रहती हैं और भारत अपने गण और तंत्रके समन्वित प्रयासोंसे इनका सामना करनेमें सदैव सफल रहा है। भारत इस समय अनेक चुनौतियोंका सामना कर रहा है। सीमापर जहां एक ओर चीनसे तो दूसरी ओर पाकिस्तानसे मिलनेवाली चुनौतियोंका भारतने मुंहतोड़ जवाब दिया है। भारतीय सेनाने अपने शौर्य और पराक्रमका श्रेष्ठïतम प्रदर्शन कर राष्टï्रका गौरव बढ़ाया है। देशकी एकता, अखण्डता और सम्प्रभुताकी रक्षामें न्यायपालिका, विधायिका और कार्यपालिकाकी उल्लेखनीय भूमिका रही है। कल्याणकारी राज्यमें सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखायके लिए विविध कार्यक्रम और योजनाएं क्रियान्वित की जाती हैं। कृषिप्रधान देश भारतमें कृषि और किसानोंके हितमें ठोस कदम उठाये गये हैं। कृषि क्षेत्रमें सुधारके लिए बहुआयामी प्रयास भी हुए हैं। इनमें नये कृषि कानून भी शामिल हैं। किसी भी कानूनके समर्थन या विरोधका गणको पूरा अधिकार है। किसान संघटन विगत दो माहसे नये कृषि कानूनोंके खिलाफ आन्दोलन कर रहे हैं लेकिन अबतक समाधानतक नहीं पहुंचा जा सका है। लोकतांत्रिक व्यवस्थामें वार्ता ही सबसे उपयुक्त माध्यम है जिससे किसी भी समस्याका निराकरण किया जा सकता है। उम्मीद है कि शीघ्र ही इसका स्वीकार्य समाधान निकल आयगा, जो देशके हितमें होगा और इससे गणतंत्रकी मर्यादामें भी वृद्धि होगी।