Post Views: 32 जग्गी वासुदेव यदि कोई जीवनको ही नहीं समझता तो वह यह कैसे समझ सकता है कि मृत्यु क्या है। अभी तो जीवित हैं परन्तु यदि यह नहीं समझ पाते कि आप कहां हैं तो फिर उस बातको कैसे समझ पायंगे जो अभी होना बाकी है। मृत्यु जैसा कुछ भी नहीं है। यहां […]
Post Views: 30 जग्गी वासुदेव आपको कर्मोंको सुलझानेमें असलमें कोई प्रयास नहीं करना पड़ेगा, क्योंकि जब आप अपने कर्मोंके साथ खेल रहे हैं तो आप ऐसी चीजके साथ खेल रहे हैं, जिसका कोई अस्तित्व नहीं है। यह मनका एक जाल है। बीते हुए समयका कोई अस्तित्व नहीं है परन्तु आप इस अस्तित्वहीन आयामके साथ ऐसे […]
Post Views: 18 भारतमें जब भी लोकतंत्र और संसदीय प्रणालीकी चर्चा होती है, उसका स्रोत ब्रिटिश सरकारको ही जाता है। वर्तमान संसदीय प्रणाली आधारित हमारा लोकतंत्र लगभग ब्रिटिश प्रणालीपर आधारित है। जिस तरह ब्रिटेनमें कॉमन सभा और लार्ड सभाके रूपमें दो सदन है वैसे ही हमारे यहां लोकसभा एवं राज्यसभा है। अंग्रेजोंकी पूरी कल्पना और […]