सम्पादकीय

नये खतरेका संकेत


कोरोना महामारीके खिलाफ मजबूत जंगके बीच संक्रमणमें निरन्तर वृद्धि गम्भीर चिन्ता और नये खतरेका संकेत है। प्रतिदिन मरीजोंकी संख्या बढ़ रही है जिससे भारत अब कोरोनाके नये मामलोंके सन्दर्भमें पूरे विश्वमें १७वें स्थानसे पांचवें स्थानपर आ गया है। अब चार देश अमेरिका, ब्राजील, इटली और फ्रांस भारतसे आगे हैं। भारतकी स्थितिको खराब बनानेमें छह राज्यों महाराष्टï्र, केरल, पंजाब, तमिलनाडु, गुजरात और कर्नाटकका विशेष योगदान है, जहां नये मामले तेजीसे बढ़ रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्रालयकी ओरसे शुक्रवारको जारी आंकड़ोंके अनुसार पिछले २४ घण्टोंके दौरान देशमें कोरोनाके लगभग १७ हजार नये मामले सामने आये जिससे संक्रमणके कुल मामलोंकी संख्या बढ़कर १,११,७३,७६१ हो गयी। इस अवधिमें ११३ लोगोंकी मृत्यु हुई, जबकि देशमें अबतक १,५७,५४८ लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। ठीक होनेवालोंकी संख्या भी बढ़ी है। अबतक कुल १.०८ करोड़ लोग कोरोनाको मात देनेमें सफल रहे हैं। देशमें मृतकोंकी संख्या कम हो रही है लेकिन सक्रिय मरीजोंकी संख्या बढऩेसे भारत विश्वमें १३वें स्थानपर पहुंच गया है। विश्व स्वास्थ्य संघटनने चेतावनी दी है कि यूरोपीय देश फिर गम्भीर संक्रमणकी चपेटमें आ रहे हैं। नये मरीज बढ़ रहे हैं। इसलिए दुनियाको सतर्क रहनेकी जरूरत है। भारतमें टीकाकरणका अभियान तेजीसे चल रहा है। इसमें अधिकतम भागीदारी होनी चाहिए। दिल्ली उच्च न्यायालयने इस बातपर चिन्ता जतायी है कि सभी श्रेणीके लोगोंको टीके क्यों नहीं लगाये जा रहे हैं। न्यायालयका यह भी कहना है कि दूसरे देशोंको टीके दानमें दिये जा रहे हैं, जबकि अपने लोगोंको टीका नहीं लग रहा है। इससे ऐसा प्रतीत हो रहा है कि टीका लगानेकी क्षमताका सही इस्तेमाल नहीं हो रहा है। सर्वोच्च न्यायालयका यह कहना भी उचित है कि सभी सरकारी और निजी अस्पतालोंमें बुजुर्ग लोगोंको विशेष प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उपचार और अस्पतालोंमें भरती किये जानेपर उन्हें विशेष महत्व दिया जाय। शीर्ष न्यायालय और दिल्ली उच्च न्यायालयकी टिप्पणियों और आदेशोंपर ध्यान देनेकी जरूरत है। साथ ही सभी नागरिकोंको भी कोरोनासे बचावके लिए पूरी सावधानी और सतर्कता बरतनेकी आवश्यकता है, क्योंकि कोरोनाके बड़े खतरोंके संकेत मिलने लगे हैं। इसलिए किसी भी प्रकारकी छोटी-बड़ी लापरवाहीके घातक परिणाम सामने आ सकते हैं। देशमें टीकेकी पर्याप्त उपलब्धता भी सुनिश्चित की जानी चाहिए जिससे कि सभी श्रेणीके लोगोंको टीके लगाये जा सकें।

नक्सली हमला

आतंकवादके साथ नक्सली हिंसा देशके लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। झारखण्डके लातेहार जिलेमें नक्सलियोंने घात लगाकर पुलिसकी पीसीआर वैनको निशाना बनाया। उन्होंने दो डायनेक्शनल बारूदी सुरंग विस्फोट किये, जिसमें उपनिरीक्षक सहित तीन पुलिसके जवान शहीद हो गये, जबकि तीन अन्य बुरी तरह जख्मी हो गये। हालांकि हमलेके बाद नक्सलियोंको पकडऩेके लिए सघन सर्च आपरेशन चलाया जा रहा है और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और सीआरपीएफ-६० बटालियनके कामण्डर भी मौकेपर डटे हुए हैं लेकिन उन्हें अभीतक कोई कामयाबी हाथ नहीं लगी है। उग्रवाद प्रभावित लांजी जंगलमें सुरक्षाबल जहां नक्सलियोंके खिलाफ अभियान चला रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ नक्सली सुरक्षाबलोंको निशाना बना रहे हैं, जो राज्य सरकारके लिए बड़ी चुनौती है। राज्यमें विधानसभा चुनाव होनेवाले हैं जिसके लिए तमाम पार्टियोंके नेता इन दिनों यहां चुनावी रैली कर रहे हैं। ऐसेमें नक्सलियोंकी गतिविधियां तेज होना चिन्ता बढ़ानेवाली है। वर्ष २००९ से नक्सलियोंके खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है लेकिन अभीतक उन्हें जड़से समाप्त नहीं किया जा सका है, क्योंकि नक्सली घटनाके बाद सुरक्षित स्थानोंपर शरण ले लेते हैं जबकि पुलिस उन्हें जंगलोंमें खोजती है। नक्सली हिंसापर झारखण्डके मुख्य मंत्री हेमन्त सोरेनने गहरा दुख व्यक्त करते हुए शहीद पुलिसकर्मियोंके परिवारके प्रति संवेदना व्यक्त की है, लेकिन शहीद पुलिसकर्मियोंका बदला लेनेके लिए उन्हें प्रभावी काररवाई करनी चाहिए। सरकारको राज्यसे सटे गांवोंपर भी नजर रखनी होगी जिससे नक्सलियोंको उनके अंजामतक पहुंचाया जा सके। इसके साथ ही नक्सल प्रभावित इलाकोंमें नियमित सघन सर्च आपरेशन चलाकर उनकी गतिविधियोंपर अंकुश लगाना चाहिए। इसके लिए केन्द्र सरकारको भी चाहिए कि नक्सलियोंके उन्मूलनमें राज्योंको अपना पूर्ण सहयोग प्रदान करे। केन्द्र और राज्यको मिलकर इस समस्याको समाप्त करनेके लिए कदम उठाना चाहिए।