पटना

पटना: दही-चुड़ा भोज से कांग्रेस में राजनीति गर्म


  • कौन बनेगा अगला अध्यक्ष, घोषणा एआइसीसी बैठक के बाद
  • बदलेगा समीकरण, नये चेहरे को ताज मिलना तय

(आज समाचार सेवा)

पटना। बिहार कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर प्रेसर पॉलिटिक्स चरम पर है। अगला अध्यक्ष कौन होगा, किसकी दावेदारी मजबूत होगी। संकट के दौर में एकजुटता प्रदर्शित करने के लिए सोमवार को अचानक विधान पार्षद व कार्यकारी अध्यक्ष डा समीर कुमार सिंह आवास पर दिग्गजों का जुटान इसकी बात का संकेत दे रहा है।

कहा जा रहा है कि नये वर्ष में सभी वरीय नेताओं के सम्मान में भोज का आयोजन था, परंतु बैठक में भाग ले रहे प्रमुख नेता की मानें तो लोकसभा व विधानसभा चुनाव में पार्टी की शर्मनाक प्रदर्शन से आलाकमान की तिरछी  नजर से बचाव को लेकर चर्चा हुई। एक ग्रुप की बैठक में पार्टी प्रभारी की मौजूदगी में जिस तरह का प्रायोजित हंगामा कराया गया उससे आलकमान की भृकुटी तन गयी है।

बिहार प्रभारी रहे शक्ति सिंह गोहिल का इस्तीफा व भक्त चरण दास के नये प्रभारी बनने के बाद एआइसीसी में बिहार का वर्तमान नेतृत्व अब कमजोर हुआ है। अब नये चेहरे की खोज हो रही है। चर्चाओं के अनुसार इस पार्टी की बागडोर किसी दलित को या फिर अल्पसंख्यक को कमान सौंपा जा सकता है। अगर ऐसा हुआ तो कुटुंबा विधायक राजेश राम या पूर्व विधायक पूनम पासवान की ताजपोशी हो सकती है।

अगर अल्पसंख्यक को प्रदेश अध्यक्ष बनाने की बात होगी तो पूर्व सांसद व राष्ट्रीय महासचिव तारिक अनवर या कदवा विधायक शकील अहमद खान को यह जिम्मेवारी सौंपी जा सकती है। बताया जा रहा है कि एआइसीसी का अधिवेशन निकट भविष्य में संभावित है। इसके अतिरिक्त पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होना है। राहुल गांधी के नये अध्यक्ष के रुप में ताजपोशी के बाद बिहार को नया अध्यक्ष मिल सकता है।

इधर डा समीर कुमार सिंह के आवास पर चर्चा का केंद्र विंदु यह था कि आलाकमान को यह समझाने का प्रयास किया जाये कि अगड़ों के हाथों कमान सौंपे जाने पर ही कांग्रेस का भ्विष्य सुरक्षित रह सकता है। ऐसे में कार्यकारी अध्यक्ष व पूर्व मंत्री श्याम सुंदर सिंह धीरज और विधान पार्षद डा समीर कुमार सिंह की दावेदारी आलाकमान के समक्ष पेश किया जाये। इन दोनों नामों का एक खास गुट जकर विरोध कर रहा है।

दही-चुडा भोज में अभियान समिति अध्यक्ष व राज्यसभा सदस्य डा अखिलेश कुमार सिंह, प्रदेश अध्यक्ष डा मदन मोहन झा, कार्यकारी अध्यक्ष डा अशोक कुमार, श्याम सुंदर सिंह धीरज, कौकब कादरी, पूर्व अनिल शर्मा के अलावा कई विधायक, विधान पार्षद व पूर्व विधायक मौजूद थे।

बहरहाल डीनर पॉलिसी भविष्य में क्या गुल खिलायेगी यह तो निश्चितता के भंवर में फंसा है, परंतु नय टीम के लिए पटना से दिल्ली तक रेस शुरू हो गया है। सबसे आश्चर्य है कि कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता अजित शर्मा और पूर्व नेता सदानंद सिंह इन सारी कबायद से दूर दिख रहे हैं। उनकी उपेक्षा दावेदारो को कहीं भारी न पड़ जाये।