पटना

पटना: पुलिसकर्मियों को ड्यूटी में घायल होने पर सरकार नहीं देगी इलाज का सारा खर्च


पटना (आससे)। बिहार पुलिस के पुलिसकर्मियों को ड्यूटी के दौरान जख्मी होने पर इलाज पर हुआ पूरा खर्च वापस नहीं मिलेगा। इतना ही नहीं, अगर ड्यूटी के दौरान जख्मी होने के बाद अगर उपचार के दौरान मौत भी हो जाती है तो भी इलाज का पूरा खर्च नहीं दिया जाएगा। बिहार सरकार ने फैसला लिया है कि ड्यूटी के दौरान घायल होने पर पुलिसकर्मियों को भी बाकी सरकारी कर्मचारियों की तरह ही सेंट्रल गर्वमेंट हेल्थ स्कीम की तय दरों के हिसाब से ही राशि का भुगतान किया जाएगा। यदि इस दर से ज्यादा की राशि उपचार पर खर्च होती है तो भी उन्हें वही रकम वापस की जाएगी जो तय दर के अनुसार बनती है।

गृह विभाग ने प्रस्ताव बनाकर पुलिसकर्मियों को इलाज का पूरा खर्च वापस करने की डिमांड की थी, जिसे स्वीकार नहीं किया गया है। प्रस्ताव में कहा गया था कि पुलिसर्कियों की ड्यूटी कठिन श्रेणी में आती है। ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मियों को खतरों का सामना करना पड़ता है। कई बार गंभीर चोटें भी लगती हैं। इस वजह से कई बार बेहतर इलाज के लिए घायल पुलिसकर्मियों को बड़े अस्पताल में भर्ती कराना पड़ता है। यहां इलाज पर होने वाला खर्च उन्हें खुद ही भरना होता है। इसे देखते हुए बिहार पुलिस मुख्यालय ने प्रस्ताव बनाकर गृह विभाग के जरिए स्वास्थ्य विभाग को भेजा था, जिसमें ड्यूटी या विधि-व्यवस्था सुचारू करने के दौरान जख्मी होने या फिर इलाज के दौरान जान जाने पर इलाज के पूरे खर्च की प्रतिपूर्ति की डिमांड की गई थी।

पुलिस मुख्यालय की ओर से बताया गया है कि इस संशोधन प्रस्ताव पर स्वास्थ्य विभाग ने मंजूरी नहीं दी है। विभाग ने साल 2015 और 17 के दो संकल्पों का जिक्र करते हुए ऑन ड्यूटी जख्मी या मृत पुलिसकर्मियों को अन्य सरकारीकर्मियों की तरह ही चिकित्सा में व्यय की गई राशि के नियमानुसार भुगतान की सलाह दी है।

स्वास्थ्य विभाग में संशोधन प्रस्ताव खारिज होने पर पुलिस मुख्यालय ने अपने सभी इकाइयों के साथ रेंज और जिलों को पत्र लिखकर इस बारे में सूचित कर दिया है। एडीजी (बजट, अपील एवं कल्याण) पारसनाथ की ओर से लिखे गए पत्र में साफ तौर पर कहा गया है कि स्वास्थ्य विभाग के उक्त संकल्प में जो प्रावधान हैं उसी के मद्देनजर काररवाई की जाए।

इस मसले पर पुलिस एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष मृत्युंजय कुमार सिंह ने कहा कि पुलिसकर्मियों की ड्यूटी की तुलना अन्य सरकारी कर्मचारियों से नहीं की जा सकती है। समाज में लॉ एंड ऑर्डर बनाए रखने पुलिस को बेकाबू भीड़, खूंखार अपराधियों, नक्सलियों और समाज के उदंड लोगों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में पुलिसकर्मी आए दिन हादसे के शिकार होते रहते हैं। इसलिए पुलिसकर्मियों को इलाज के लिए कैशलेस कार्ड मिलना चाहिए।