Post Views: 862 डा. विनोद श्रीमद् भागवत साक्षात भगवानका स्वरूप है इसीलिए श्रद्धापूर्वक इसकी पूजा-अर्चना की जाती है। इसके पठन एवं श्रवणसे भोग और मोक्ष दोनों सुलभ हो जाते हैं। मनकी शुद्धिके लिए इससे बड़ा कोई साधन नहीं है। सिंहकी गर्जना सुनकर जैसे भेडिय़े भाग जाते हैं, वैसे ही भागवतके पाठसे कलियुगके समस्त दोष नष्ट […]
Post Views: 465 संजय राय दिनिया इस समय दो महामारियोंसे जूझ रही है। वैश्विक महामारी कोरोना और राजनीतिक महामारी। इसका सबसे बुरा असर आम आदमीके जनजीवनपर पड़ रहा है। देशकी केंद्रीय और अधिकतर राज्योंकी राजनीतिमें इस समय भाजपाकी सरकार है। भाजपा एक दक्षिणपंथी धुर राष्ट्रवादी राजनीतिक दल है। पंडित दीनदयाल उपाध्यायका ‘एकात्म मानववादÓ को इस […]
Post Views: 511 भाषा अभिव्यक्तिका सर्वाधिक विश्वसनीय माध्यम है। मनुष्यको सभ्य बनानेके लिए शिक्षा जरूरी है और सभी प्रकारकी शिक्षाका माध्यम भाषा ही है। किसी जमानेमें संसदकी भाषाको श्रेष्ठ और मर्यादित माना जाता था। अब १९९० के दशकके बाद यह धारणा लगातार खंडित हो रही है, क्योंकि हमारी विधायिका और कार्यपालिकाकी भाषा विकृत होती जा […]