Post Views: 697 बलदेव राज भारतीय मन चंचल है। मनकी स्थिरता शांति प्रदान करती है। परंतु मनके तुरंग उसे कहां स्थिर रहने देते हैं। मन ही है, जिसके लिए कोई स्थान दुर्गम नहीं है। मन ही है, जिसकी गति प्रकाशकी गतिसे भी अधिक है या यूं कह लीजिए कि समस्त ब्रह्मïाण्डमें सबसे तेज गति मनकी […]
Post Views: 655 अशोक भगत दुनियाकी दूसरी सबसे बड़ी जनसंख्यावाला देश भारत रोजगारके मामलेमें बेहद पिछड़ा माना जाता है। मानव सभ्यता विकासके प्रथम चरणसे ही प्रगतिका मापदंड रोजगार ही रहा है। इसमें यदि कोई देश पिछड़ा है तो अमूमन यह मान लिया जाता है कि उसकी आर्थिक प्रगति कमजोर है। आंकड़ोंके अनुसार भारतमें मात्र ३.७५ […]
Post Views: 1,274 दिव्यचेतनानंद आनंद मार्गका साधारण अर्थ है. वह मार्ग जो मनुष्यको परमानंदका रास्ता दिखाये। आनंद मार्ग मनुष्यको त्रिस्तरीय विकासके लिए प्रेरित करता है। विकासके ये तीन स्तर हैं-शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक विकास। परम आनंदकी प्राप्तिके लिए योग साधना नितांत आवश्यक है। आनंद मार्गका उद्देश्य है, आत्म मोक्षार्थम् जगत हिताय च। यानी आत्माकी मुक्ति […]