Post Views: 891 श्रीराम शर्मा कई बार मनुष्य अपने अनुचित कार्यों और आदतोंके संबंधमें दुखी भी होता है और सोचता है कि उन्हें छोड़ दूं। अवांछनीय अभ्यासोंकी प्रतिक्रिया उसने देखी-सुनी भी होती है। परामर्श उपदेश भी उसी प्रकारके मिलते रहते हैं, जिनमें सुधारनेके लिए कहा जाता है। सुननेमें वह परामर्श सारगर्भित भी लगते हैं। किंतु […]
Post Views: 930 भारतीय दलित राजनीति वर्तमान समयमें सर्वाधिक दिग्भ्रमित दौरमें है। दुर्भाग्यसे वर्तमान समय ही इतिहासका वह संधिकाल या संक्रमणकाल है जबकि दलित राजनीतिको एक दिशाकी सर्वाधिक आवश्यकता है। भीम मीमके नामका सामाजिक जहर बाबासाहेब अम्बेडकरके समूचे चिंतनको लील रहा है। भीम मीमके इतिहासको देखना, पढ़ना एवं समझना आजके अनसुचित जाति समाजकी सबसे बड़ी […]
Post Views: 741 प्रमेश सर्राफ धमोरा संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा १९७२ में पहली बार विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया था। लेकिन विश्व स्तरपर इसके मनानेकी शुरुआत ५ जून १९७४ को स्वीडनकी राजधानी स्टॉकहोममें हुई थी। जहां ११९ देशोंकी मौजूदगीमें पर्यावरण सम्मेलनका आयोजन किया गया था। साथ ही प्रति वर्ष ५ जूनको विश्व पर्यावरण दिवस मनानेका […]