Post Views: 861 विजयनारायण भारत सरकार तीनों किसान कानूनोंके विभिन्न पहलुओंपर किसान संघटनोंके नेताओंको बुलाकर सलाह-मशविरा कर सकती थी। किन्तु उसने ऐसा नहीं किया। तीनों ही कृषि विधेयक संसदके विगत सत्रमें हड़बड़ीमें पारित करा दिये गये। लोकसभामें पारित करानेके बाद विधेयकोंको राज्यसभामें उस समय पेश किया गया जब सत्र समाप्त हो रहा था। राज्यसभामें भारी […]
Post Views: 621 अवधेश कुमार किसी भी देशमें आन्दोलन होता है तो कहींसे भी लोग प्रतिक्रिया व्यक्त करते हैं। प्रतिक्रियाएं सही हैं गलत हैं यह हमारे नजरियेपर निर्भर करता है। जिस देशका मामला होता है वह अपने तरीकेसे उसपर जवाबी प्रतिक्रियाएं देता है। यह विकसित सूचना संचारवाले वर्तमान विश्वकी सचाई है। कृषि कानूनोंके विरोधमें आन्दोलन […]
Post Views: 883 आनन्द उपाध्याय अन्तत: नन्दीग्राममें प्रचार अभियानकी समाप्तिके पूर्व इलाकेमें सुबह ममता बनर्जीने जहां ३० फीसदी मुस्लिम बैंकके अपने परम्परागत वोट बैंकको साधनेके लिए जय श्रीरामके नारे लगानेवालोंको घटिया आदमीका नया तमगा दिया, वहीं दुपहरतक अन्य सभामें बहुसंख्यक समुदायके ७० प्रतिशत मतदाताओंको साधनेकी चाल चलते हुए बाकायदा अपने ब्राह्मïण होनेकी पैंतरेबाजीके नये कार्ड […]