Post Views: 876 बाल मुकुन्द ओझा आज भी दुनिया परिवार और संयुक्त परिवारकी अहमियतको लेकर विवादोंमें उलझी है। भारतमें संयुक्त परिवार प्रणाली बहुत प्राचीन समयसे ही विद्यमान रही है। वह भी एक जमाना था जब भरा पूरा परिवार हंसता खेलता और एक-दूसरेसे जुड़ा रहता था। बच्चोंकी किलकारियोंसे मोहल्ला गूंजता था। पैसे कम होते थे परन्तु […]
Post Views: 1,178 जी.पार्थसारथी जिस उम्मीदसे महत्वाकांक्षी चीन सीपीईसी यानी चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा योजनामें ६२ खरब डालरका निवेश कर रहा है, उसके निहितार्थ अत्यन्त गम्भीर हैं। इस गलियारेके माध्यमसे चीनके समुद्र तटविहीन प्रांतोंकी पंहुच फारसकी खाड़ीतक बनानी है। इसका एक मकसद यह भी है कि यदि कभी हिंद महासागरसे होकर चीनतक आनेवाली पेट्रोलियमकी सप्लाई या […]
Post Views: 768 बलदेव राज भारतीय मन चंचल है। मनकी स्थिरता शांति प्रदान करती है। परंतु मनके तुरंग उसे कहां स्थिर रहने देते हैं। मन ही है, जिसके लिए कोई स्थान दुर्गम नहीं है। मन ही है, जिसकी गति प्रकाशकी गतिसे भी अधिक है या यूं कह लीजिए कि समस्त ब्रह्मïाण्डमें सबसे तेज गति मनकी […]