सम्पादकीय

शीघ्र ही मजबूत होगी देशकी आर्थिकी


 डा. गौरीशंकर राजहंस     

जब कोरोनाकी दूसरी लहरका प्रकोप अपने पूरे चरमपर था तब देशके कुछ अर्थशास्त्रियोंने ठीक ही कहा था कि जब कोरोनाकी दूसरी लहर समाप्त होगी तब भारतकी अर्थव्यवस्था छिन्न-भिन्न दिखेगी। पहलेकी तरह वह अपने पैरोंपर आसानीसे नहीं खड़ी हो सकेगी। इसका प्रमुख कारण यही होगा कि देशमें बेरोजगारीकी दर बहुत बुरी तरह गिर चुकी है। देशकी एक प्रमुख संस्था ‘सेण्टर फोर मोनिटरिंग इकोनोमीÓ ने कहा था कि अर्थव्यवस्थामेें मजदूरोंके पलायनसे स्थिति अत्यन्त भयंकर हो गयी है। इसका कहना था कि गत ३० मईको बेरोजगारीकी दर करीब १८ प्रतिशत हो गयी थी। अब जबकि स्थितिमें कुछ सुधार हो रहा है तब लगता है कि लेाग धीरे-धीरे इस बातसे समझौता करेंगे कि अब कुछ ऐसा नहीं किया जाय जिससे देशमें कोरोनाको दुबारा पैर पसारनेका मौका मिले। अब जब धीरे-धीरे कई राज्योंमें लोकडाउनमें ढील जा रही है तो यह देखकर घोर आश्चर्य हो रहा है कि अधिकतर लोग समझदारीका परिचय नहीं दे रहे हैं। भेड़चालमें बिना मास्क और बिना दूरी बनाये दुकानोंपर एकदम टूट पड़ रहे है। भारतके पड़ोसमें जितने भी देश हैं उनमें बेकार पड़े मजदूरोंकी सख्या पांच प्रतिशतके आसपास बतायी जा रही है चाहे वह चीन हो, बंगलादेश अथवा श्रीलंका और पाकिस्तान या नेपाल और भूटान हो। परन्तु भारतमें बेकार मजदूरोंकी संख्या इन सबसे बहुत ज्यादा करीब आठ प्रतिशत बतायी जा रही है। जब कोरोनाका दूसरा दौर आया था तब दिल्ली, पजाब, हरियाणा, गुजरात और महाराष्ट्रसे लाखोंकी संख्यामें जो बिहार और उत्तर प्रदेशके रहनेवाले प्रवासी मजदूर थे वह पैदल ही अपने घरोंकी ओर कूच कर गये। कई सप्ताह पैदल चलते हुए उन्होंने अपने गांव पहुंचकर पाया कि गांवमें उनके लिए कोइ रोजगार नहीं था। उन्हें केवल मनरेगामें रोजगारके कुछ साधन मिल रहे थे। मनरेगामें मिलनेवाले रोजगारमें उनका गुजारा नहीं हो पा रहा था। केन्द्र सरकार ने स्थितिमें सुधार करनेके पूरे प्रयास किये। परन्तु स्थितिमें यथेष्ठ सुधार नहीं हो पाये।

अब जबकि अर्थव्यवस्था अपने बुरे दौरसे धीरे-धीरे बाहर निकल रही है और कई राज्योंने धीरे-धीरे लाकडाउन हटाना शुरू कर दिया तो देशके अर्थशास्त्री उम्मीद करने लगे हैं कि अर्थव्यवस्था फिरसे पटरीपर आ जाय। आर्थिक विशेषज्ञों और मौसम विज्ञानियोंका कहना है कि इस साल देशमेें अच्छा मानसून रहनेकी संभावना है। सरकारकी तरफसे किये जानेवाले पंूजीगत निवेश और देशसे किये जानेवाले निर्यातकी मांगमें वृद्धि हो रही है। देशमें कोरोनाके मुफ्त टीकाकरणमें आने खर्चको केन्द्र सरकारने स्वयं वहन करनेकी घोषणा कर दी है जिसे २१ जूनसे चालू किया जायगा। प्रसिद्ध अर्थशास्त्रियोंका कहना है कि अर्थव्यवस्थाके खुलनेसे मोबिलीटीमें वृद्धि होगी। आपूर्ति और सुगम हो जायगी और विकासकी गति तेजीसे बढ़ेगी। इसके अलावा सरकारके पंूजीगत खर्चसे निर्माण और उत्पादन क्षेत्रको बहुत बल मिलेगा। कोरोनाकी दूसरी लहरसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था छिन्न-भिन्न हो गयी थी। वह अच्छे मानसूनसे पटरीपर आ जायगी। वरिष्ठ आर्थिक विशेषज्ञोंका कहना है कि केन्द्र सरकार द्वारा टीकाकरण कार्यक्रमको अपने हाथमें ले लेनेसे अब वैक्सीनकी उपलब्धता सुगम हो जायगी जिससे अर्थव्यवस्थामें तेजी आयगी। अर्थशास्त्रियोंका कहना है कि यदि टीकाकरणकी गति तेज होगी तो निश्चित रूपसे आनेवाले दिनोंमें हमारी अर्थव्यवस्थाकी गति तेज होगी और भारत अपनी कोरोनाके पूर्वकी स्थितिमें आर्थिक रूपसे शीघ्र आ सकता है।

कोरोनाका कहर जब अपने यौवनपर था तो हिन्दीभाषी राज्य, खासकर बिहार और उत्तर प्रदेशके मजदूर भागकर अपने गांव जा रहे थे। परन्तु गांवोंमें स्थिति अत्यन्त दयनीय थी। वहा रोगजारके साधन उपलब्ध नहीं थे। बिहार जैसा राज्य कभी बाढ़ और कभी सूखाका शिकार हो जाता था इसलिए प्रवासी मजदूरोंको भागकर दूसरे राज्योंमें जानेकी लाचारी थी। परन्तु दूसरे राज्योंमें कोरोनाके प्रकोपसे मौत मंडराती दिख रही थी और सैंकड़ों-हजारों लोग मौतके मुंहमें समा गये थे। लगता है कि अब स्थितिपर शीघ्र ही काबू पा लिया जायगा। व्यापक टीकाकरणके कारण अब गांव-गांवमें लोगोंको वैक्सीन मिलेगा और सरकारने मीडियाके माध्यमसे यह प्रचार किया है कि जो लोग टीकाकरणके खिलाफ मजदूरोंको भड़काते हैं तो उन्हें कठोर दंड दिया जायगा। इसके टीकाकरणको गति मिलने लगेगी। लगता है कि देर या सबेर अर्थव्यवस्था निश्चित रूपसे पटरीपर आ जायगी। महामारीके दौरान प्राय: ३० हजार बच्चे अनाथ और बेसहारा हो गये हैं उनके माता-पितामेंसे एक अथवा दोनोंकी मौत हो गयी है उन्हें अब सहारा देनेवाला कोई नहीं बचा है। ऐसेमें गैर-सरकारी संस्थाओंको चाहिए कि वह इन बेसहारा बच्चोंकी मददके लिए आगे आयें। उनके भोजन और रहने आदिका प्रबध करें। उनके स्वास्थ और शिक्षाका प्रबंध करें। केन्द्र और सरकारोंको इस दिशामें पहल करनी चाहिए। उम्मीदकी इन किरणोंके बीच एक अत्यन्त ही खौफनाक खबर आ रही है कि देशके कुछ भागोंमें कोरोनाकी तीसरी लहर देखी गयी है जो अत्यन्त ही चिन्ताकी बात है और सरकार तथा गैर-सरकारी संस्थाओंको मिलकर आगाह करना होगा और कोरोनासे बचनेके लिए मास्क तथा दूसरे सुरक्षा उपायोंको अपनाना होगा और यह मानकर चलना होगा कि कोरोनाका वायरस अभी गया नहीं है और हमें सारी शक्ति लगाकर कोरोनाकी हर लहरका मुकाबला करना होगा।