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स्थानीय स्तर पर फुटपाथ की निगरानी, विश्व में प्रतिवर्ष 13.5 लाख लोगों की मृत्यु


नई दिल्ली, गुंजा सिंह। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार सड़क दुर्घटनाओं के कारण विश्व में प्रतिवर्ष 13.5 लाख लोगों की मृत्यु होती है और लगभग पांच करोड़ लोग शारीरिक रूप से अक्षम हो जाते हैं। भारत की बात करें तो सालाना लगभग डेढ़ लाख लोग रोड एक्सीडेंट से मौत का शिकार हो जाते हैं। इन दुर्घटनाओं के कारणों पर गौर करें तो सड़क व परिवहन मंत्रलय के अनुसार भारत में 71 प्रतिशत दुर्घटनाएं वाहन चालकों के ओवर स्पीडिंग के कारण होते हैं, लेकिन इन दुर्घटनाओं के शिकार होने वालों में बड़ी संख्या पैदल चलने वालों की भी होती है। वैसे पैदल चालकों की सुरक्षा के लिए कुछ वर्ष पूर्व दिशानिर्देश बनाए गए थे, परंतु केवल नियमों के सहारे इनकी सुरक्षा संभव नहीं है। इसके लिए हमें एक नया दृष्टिकोण अपनाते हुए सड़क सुरक्षा, शहरी योजना, राजमार्ग निर्माण, व्यवहार परिवर्तन आदि विविध मोर्चो पर एक साथ तत्परता दिखानी होगी। चूंकि सर्वाधिक दुर्घटनाएं अधिक गति के कारण होती हैं, लिहाजा वाहनों द्वारा गति सीमा का उल्लंघन नहीं हो यह सुनिश्चित करना पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। यह काम केवल पुलिस के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता है। ओवर स्पीडिंग एक व्यवहार संबंधी समस्या है। खासकर किशोरों में इस प्रवृत्ति और जुनून के पीछे जैविक यानी हार्मोनल कारणों के साथ साथ कई अन्य कारण भी हैं, जैसे रेसिंग वाले वीडियो गेम और फिल्मों का भी छोटी-मोटी दुर्घटनाओं को सामान्य बना देने में एक बड़ा योगदान है। ऐसे में जरूरी है कि जब भी कोई व्यक्ति वाहन चलाए तो वह इस बात को समङो कि रेस लगाना, बाइक पर खतरनाक स्टंट करना, कहीं भी किसी भी दुकान, फुटपाथ आदि पर गाड़ी चढ़ा देना, पैदल यात्रियों का अपनी जान बचाकर भागना एक मजाक या हीरोगिरी नहीं है।