Post Views: 1,061 देखा जाय तो एक ओर हम सरकारको व्यवस्थापर अपनी खीझ और गुस्सा निकालनेसे बाज नहीं आते हैं। वहीं दूसरी ओर हमारा गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार पूरे समाजके लिए खतरेका कारण बन सकता है। वास्तवमें कोरोनाके प्रकोपके सामने सारी व्यवस्थाएं अस्त-व्यस्त हो गयी हैं। यह होना स्वाभाविक भी है। १३५ करोड़की आबादीवाले देशमें किसी महामारीसे […]
Post Views: 895 देविंदर शर्मा भारतीय और यूरोपियन किसानके बीच तुलनात्मक अध्ययनमें पाया गया कि भारतके खेतोमें फसल उगानेके लिए होने आनेवाला खर्च क्योंकि अपेक्षाकृत कम है तो उन्हें अंतरराष्ट्रीय व्यापारका विकल्प खुलनेका कोई आर्थिक लाभ हुआ है। यह वह आम धारणा है, जिसे मुख्यधाराके अर्थशास्त्रियोंने किसानोंके विरोधके बावजूद व्यापार संधिपर हस्ताक्षरको न्यायोचित बतानेके लिए […]
Post Views: 1,175 कोरोना वैश्विक महामारीके बीच अब भारतके अनेक हिस्सोंमें बर्ड फ्लूका कहर लोगोंके लिए गम्भीर चिन्ताका विषय बन गया है। कोरोनाके संक्रमणमें अवश्य कमी आयी है लेकिन उनके नये स्ट्रेनका खतरा भी बढ़ गया है। ब्रिटेनसे आये नये स्ट्रेनसे संक्रमित पुणेमें बीस नये मरीज मिले हैं जिससे संक्रमितोंकी संख्या ५८ हो गयी है। […]