Post Views: 1,051 श्रीराम शर्मा आजकी समस्याओंका यही सबसे सही समाधान है कि ऐसे व्यक्तियोंकी संख्या बढ़े जो निजी स्वार्थोंकी अपेक्षा सार्वजनिक स्वार्थोंको प्रधानता दें और इस संदर्भमें अपनी प्रामाणिकता सिद्ध करनेके लिए वैसी जीवन प्रक्रिया जीकर दिखायें जिसे सत्ताधारियोंके लिए आदर्श माना जा सके। यदि लोगोंमें समाजके हित साधनकी उतनी ही ललक हो जितनी […]
Post Views: 1,000 राजेश माहेश्वरी जो दृश्य इस समय बंगालमें है उससे प्रतीत होता है कि इस बार पश्चिम बंगालका चुनाव रोमांचक और आक्रामक होगा। वर्तमान विधानसभामें तृणमूलके २११ और भाजपाके मात्र तीन विधायक हैं। ममता बनर्जी लगभग एक दशकसे ही मुख्य मंत्री हैं, लिहाजा कुछ स्तरोंपर सत्ता-विरोधी लहर और रूझान दृष्टिïगोचर हो रहा है। […]
Post Views: 930 आशीष वशिष्ठ संसद लोकतंत्रका वह मंदिर जिसकी तरफ पूरे देश और देशवासियोंको उम्मीदें, आशाएं और विश्वास होता है। पूरे देशकी दृष्टिï इसपर लगी रहती है। यही बैठकर हमारे द्वारा निर्वाचित प्रतिनिधि हमारे लिए कल्याणकारी नीतियां, कानून और भलाईके कार्य करते हैं। लेकिन कोरोना महामारीके समय मानसून सत्रमें जो दृश्य दिखाई दे रहे […]