Post Views: 937 हृदयनारायण दीक्षित होली जन-गण-मनका निरूद्देश्य खेल है। इसका कोई सुव्यवस्थित कर्मकाण्ड नहीं है। प्रकृति अपने उद्भवके समयसे उत्सवधर्मा है। सूर्य आनन्ददाता है। वह उगते समय ऊषा सुंदरी होते हैं। चन्द्रका उगना घटना और घटते-घटते अमावस्या हो जाना प्राकृतिक खेल है। चन्द्रका १५ दिनतक बड़ा होते जाना और पूर्णिमा होना है। वर्षा हेमंत, […]
Post Views: 662 आर.एन. तिवारी हमारे धर्माचार्योंने श्रीमद्भगवत गीताको संजीवनीकी संज्ञा दी है। यह हमें जीनेकी राह बताती है। दुर्योधनके अपने जीवन मूल्योंसे भटकनेके कारण ही महाभारतका युद्ध हुआ जिसमें करोडों लोगोंकी मौत हुई। जो केवल अपना भला चाहता है वह दुर्योधन है। जो अपनोंका भला चाहता है वह युधिष्ठिर है और जो सबका भला […]
Post Views: 2,263 भोपाल, डब्ल्यू एच ओ (WHO) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 10,000 लोगों में से 2,443 लोग मानसिक बीमारी से पीड़ित हैं। दूसरी ओर, यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 15 से 24 वर्ष की आयु के सात युवाओं में से एक अवसादग्रस्त रहता है। 20 देशों में इसका औसत […]