Post Views: 1,173 वी.के. जायसवाल जिज्ञासा प्रकृतिमें व्याप्त ज्ञानको समझनेकी त्वरित अभिलाषा है। यह शिष्य और सतगुरुके बीच संवादके उस सेतुके समान होती है जो शिष्यके ज्ञानमें मौजूद खाईंको आध्यात्मिक संवादकी तरंगों द्वारा पार कराकर उस मंजिलतक पहुंचाती है जहां पहुंचकर जिज्ञासा न केवल शान्त हो जाती है, बल्कि यही तरंगें सोचने एवं समझनेकी क्षमताको […]
Post Views: 988 लक्ष्मीकांत चावला सन् १९९१ से पूरे देशमें नगर निगमों, नगर पालिकाओं तथा पंचायतोंमें महिलाओंको ३३ प्रतिशत आरक्षणका लाभ मिला। जहां पहले महिलाएं दूसरे उम्मीदवारोंके लिए हाथ उठा-उठाकर नारे लगातीं, दिन-रात काम करती दिखाई देती थीं, इस आरक्षणके साथ महिलाएं स्वयं उम्मीदवार बनकर चुनाव क्षेत्रमें उतरीं। विशेष बात यह रही कि यदि एक […]
Post Views: 912 बाल मुकुन्द ओझा आज भी दुनिया परिवार और संयुक्त परिवारकी अहमियतको लेकर विवादोंमें उलझी है। भारतमें संयुक्त परिवार प्रणाली बहुत प्राचीन समयसे ही विद्यमान रही है। वह भी एक जमाना था जब भरा पूरा परिवार हंसता खेलता और एक-दूसरेसे जुड़ा रहता था। बच्चोंकी किलकारियोंसे मोहल्ला गूंजता था। पैसे कम होते थे परन्तु […]