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CM के विज्ञापन में तेजस्वी की तस्वीर गायब! शिक्षक भर्ती पर श्रेय की सियासत में RJD-JDU में अलग सुर क्यों?


पटना। बिहार में शिक्षक भर्ती के बाद नियुक्ति पत्र बांटने को लेकर भी सियासत तेज है। पार्टियां इसका श्रेय लेना चाहती हैं। परंतु, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक दिन पहले ही श्रेय ना लेने की नसीहत दे चुके हैं। हालांकि, इसका कुछ असर होता नहीं दिख रहा है। राजद, जदयू और इनके शीर्ष नेता अपने-अपने ढंग से श्रेय लेने के लिए प्रचार कर रहे हैं।

वहीं, खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी इसमें पीछे नहीं हैं। दरअसल, गुरुवार को पटना में नवनियुक्त शिक्षकों को नियुक्ति पत्र बांटे जाने का कार्यक्रम आयोजित हो रहा है। इसे लेकर ही यह आपाधापी मची हुई है।

पटना के गांधी मैदान में नियुक्ति पत्र वितरण समारोह में लगे पोस्टर में से तेजस्वी की तस्वीर गायब है। अखबारों में दिए गए विज्ञापन में भी तेजस्वी की फोटो नदारद है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जदयू-राजद में सब ठीक है या नहीं?

नीतीश ने दी थी श्रेय ना लेने की नसीहत

बता दें कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक दिन पहले बुधवार को ही श्रेय नहीं लेने की नसीहत दी थी। उनका इशारा राजद कोटे के मंत्री आलोक मेहता समेत अन्य सभी की ओर था। सीएम ने एक समारोह के दौरान संबोधित करते हुए यह बात कही थी। यहां पढ़ें पूरी खबर

इधर, गुरुवार सुबह तेजस्वी, ललन और राजद, जदयू ने अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट साझा श्रेय लेने का सिलसिला शुरू कर दिया। वहीं, दूसरी ओर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी अखबारों में प्रकाशित विज्ञापन के जरिए श्रेय लेने के लिए लोगों के सामने आ गए।

 

तेजस्वी की पोस्ट में क्या है?

राजद ने विधानसभा चुनावों में किए गए रोजगार के वादे को याद दिलाते हुए श्रेय लेने का प्रयास किया है। इसके लिए खुद उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट साझा की है।

तेजस्वी ने आज के दिन को ऐतिहासिक बताते हुए रिकॉर्ड नौकरी देने की बात लिखी है। उन्होंने यह भी लिखा है कि यह तो अभी शुरुआत है।

जदयू-ललन ने भी दी बधाई

इधर, तेजस्वी की पोस्ट के बाद जदयू ने अपने एक्स हैंडल पर दो पोस्ट साझा कीं। वहीं, पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने भी अपनी पोस्ट में बिहारवासियों को बधाई देते हुए नीतीश कुमार का वादा पूरा होने की याद दिलाई।

नीतीश के विज्ञापन ने बढ़ाई श्रेय लेने की होड़

इस बीच सुबह लोगों के घरों में जब अखबार पहुंचा तो पहले ही पेज पर शिक्षकों को नियुक्ति पत्र बांटने से जुड़ा एक बड़ा विज्ञापन दिखाई दिया। इसमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तस्वीर थी और शिक्षक भर्ती से जुड़ी जानकारी भी थी।

CM के विज्ञापन में लिखा- बिहार के बढ़ते कदम…

  • आजाद भारत के इतिहास में पहली बार एक ही विज्ञापन से 1,20,336 शिक्षकों की बहाली।
  • कुल चयनित शिक्षकों में 57,854 यानी 48 फीसदी महिला शिक्षक, महिला सशक्तीकरण में अग्रणी बिहार ।
  • छात्र-शिक्षक अनुपात सुधरकर पहुंचा राष्ट्रीय औसत के करीब। प्रस्तावित द्वितीय चरण की बहाली के बाद हो जायेगा राष्ट्रीय औसत से भी बेहतर।
  • कुल उत्तीर्ण अभ्यर्थियों में 88 फीसदी बिहार से। 12 फीसदी बिहार के बाहर, जैसे केरल, कर्नाटक, गुजरात, दिल्ली, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तराखण्ड, राजस्थान, असम, पश्चिम बंगाल, पंजाब, झारखंड, हरियाणा, उत्तर प्रदेश राज्यों से। रोजगार देने में यह है बदलते बिहार की तस्वीर।
  • सेना, अर्द्धसैनिक बल, रेलवे तथा बहुराष्ट्रीय कम्पनियों में कार्यरत अभ्यर्थियों तथा साथ ही कान्वेंट विद्यालय, केन्द्रीय विद्यालयों के अध्यापकों की भी परीक्षा उत्तीर्ण करने के उपरांत हुई बहाली। गुणी और सुयोग्य शिक्षकों से बदल रहा छात्रों का भविष्य।