सम्पादकीय

संसद भवनका शिलान्यास


देशमें नये संसद भवनका निर्माण होने जा रहा है। संसदके नये भवनका शिलान्यास प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदीने किया। भूमिपूजनसे पूर्व प्रधान मंत्री मोदीने परम्परागत रूपसे गणेशजीका आह्वïान किया। तत्पश्चात्ï संसद भवनकी आधारशिला रखी। इस दौरान सर्वधर्म प्रार्थनाका भी आयोजन किया गया। चार मंजिला नये भवनका निर्माण ९७१ करोड़ रुपयेकी अनुमानित लागतसे ६४५०० वर्ग मीटर क्षेत्रफलमें किये जानेका प्रस्ताव है। सम्भवत: भारतकी स्वतन्त्रताकी ७५वीं वर्षगांठतक इस प्रस्तावित भवनको पूरा कर लिया जायगा। यह नयी इमारत भूकम्परोधी होगी एवं इसमें १२२४ सांसद बैठ सकेंगे। मौजूदा संसद सन्ï १९२७ में बननेके बादसे ही संसद भवनका इस्तेमाल हो रहा है। कुछ वर्ष पूर्व राज्यसभामें बदबू आनेकी घटना हुई थी। पता चला था कि कई जगहोंपर सुरक्षा व्यवस्थाके कारण वेंटिलेशनके लिए शाफ्ट एवं खिड़कियोंको बंद कर दिया गया था। उसके बादसे ही महसूस किया जाने लगा था कि सुरक्षाकी दृष्टिïसे नये इमारतकी आवश्यकता है। संसद भवनके जिस निचले सदनमें इस वक्त ५४३ सांसद बैठते हैं, वह मात्र १८० सदस्योंके लिए बनाया गया था। देशकी बढ़ती आबादीके साथ सांसदोंकी तादाद बढ़ती गयी तो उनके लिए सीटें भी कम पड़ती गयीं। अब स्थिति यह है कि सांसदोंकी कतारोंके बीच जो डेस्क होती है उसकी चौड़ाई काफी कम रह गयी है। यही वजह रही कि जुलाई, २०१२ में ही नये भवनके लिए परिकल्पना की जाने लगी थी। तब प्रधान मन्त्री मनमोहन सिंह और लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमारने नये भवनकी आवश्यकता महसूस की थी। लोकसभाके कई सांसदोंकी सीटें ऐसी हैं जहांसे पूरे सदनका परिदृश्य दिखना मुश्किल होता है। विशेषज्ञोंके अनुसार संसद भवनकी इमारतोंकी उम्र ६० से ७० वर्ष ही होती है। क्योंकि सुरक्षाके बढ़ते मानकोंको ध्यानमें रखना कठिन होता है। मौजूदा संसद भवन लगभग नब्बे वर्षसे ऊपरका हो चुका है। वक्तके साथ कमजोर भी होने लगता है। कई जगह सीलनसे पत्थर टूट रहे हैं। इमारतमें आवश्यकताके अनुरूप इतने कमरे बना दिये गये जो इसकी मूल योजनासे कहीं मेल नहीं खाते। सुरक्षाकी दृष्टिïसे भवनके कई हिस्सोंको बंद कर दिया गया और अत्याधुनिक उपकरण लगा दिये गये। आस्ट्रेलिया, कनाडाके संसद भवनका निर्माण भी १९२७ के आसपास ही किया गया था परन्तु आस्ट्रेलियाने १९८७ में ही नये भवनमें संसदको स्थानान्तरित कर दिया। इसी प्रकार कनाडाने भी आठ वर्ष पूर्व ही भवनको नया स्वरूप दे दिया। इसलिए आवश्यक हो गया था कि भारतमें भी संसद भवनको नये कलेवर एवं अत्याधुनिक सुविधाओंके साथ तैयार किया जाय। इस भवनको २०२४ तक पूरा करनेकी योजना है। नये भवनको सभी आधुनिक आडियो-वीडियो संचार सुविधाओं और डाटा नेटवर्क प्रणालियोंसे सुसज्जित किया जायगा। साथ ही इस बातपर विशेष ध्यान दिया जायगा कि सत्रोंके आयोजनमें कमसे कम व्यवधान हो और पर्यावरण सम्बन्धी सभी सुरक्षा उपायोंका पालन किया जाय। नये भवनका निर्माण आत्मनिर्भर भारतका प्रमुख उदाहरण होगा। भूकम्परोधी इस भवनसे देशकी सांस्कृतिक विविधताके भी दर्शन होंगे। विशाल संविधान कक्षमें भारतकी लोकतांत्रिक धरोहरको प्रदर्शित किया जायगा। नया भवन बनानेके बाद पुराने भवनको संग्रहालयके तौरपर संरक्षित किया जायगा तथा इसे दर्शनार्थियोंके अवलोकनार्थ खोला जायगा।
बड़ी उपलब्धि
यह राहतकी बात है कि कोरोनाकी लड़ाईमें वैक्सीनका इन्तजार अब खत्म होनेवाला है। इसको जन-जनतक पहुंचानेकी तैयारियां युद्ध स्तरपर शुरू हो गयी है। टीका लगानेके लिए स्वास्थ्यकर्मियोंको जहां प्रशिक्षित किया जा रहा है और वैक्सीनके उचित रख-रखावके लिए राज्योंमें स्टोरेज सेण्टर बनाये जानेका काम जोरोंपर है, वहीं इसकी निगरानीके लिए भारत प्लेटफार्म तैयार कर रहा है। कोरोनासे बचावके लिए दुनियाको वैक्सीनके साथ उसका सुचारू विवरण सुनिश्चित करानेके लिए को-विन (कोरोना वैक्सीनके इंटेलीजेंस नेटवर्क) प्लेटफार्म (एप) उपलब्ध करायेगा। इस एपके जरिये वैक्सीनके कम्पनीसे निकलनेसे लेकर व्यक्तिको लगाये जानेतक उसपर नजर रखी जा सकेगी। वैक्सीनकी जरूरत और उपलब्धताके साथ उसे लेनेवाले व्यक्तिकी भी पूरी जानकारी एपके जरिये उपलब्ध होगी। भारतमें लगायी जानेवाली कोरोना वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित होगी इसका भरोसा प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदीने भारतवासियोंको दिलाया है। यह जरूरी भी है कि जो टीका लोगोंको लगाया जाय वह पूरी तरह सुरक्षित हो, क्योंकि फाइजरका टीका लगवानेके बाद लोगोंमें देखे गये दुष्प्रभाव चिन्ता बढ़ानेवाले हैं। ऐसेमें हैदराबादकी फार्मा कम्पनीकी स्वदेशी कोवैक्सीनकी ओर दुनियाकी नजर है, जो ट्रायलमें पूर्ण सफल रही है। यह भारतकी बड़ी उपलब्धि है क्योंकि भारतने कोरोनासे लड़ाईमें जिस तरह विकसित राष्टï्रोंको पछाड़ा है वह गौरवान्वित करनेवाला है। दवासे लेकर जरूरतकी सभी चीजोंको भारतने विश्वके देशोंतक पहुंचाकर मानवताकी सेवा की है। अब भारतवासियोंके साथ दुनियाके कई देशोंको स्वदेशी वैक्सीन उपलब्ध करानेकी उसकी प्रतिबद्धता देशका गौरव बढ़ानेवाली है। इसके लिए केन्द्र सरकारकी दृढ़ इच्छाशक्ति और वैज्ञानिकोंकी दिन-रातकी मेहनतकी जितनी भी सराहना की जाय, कम होगी।