Post Views: 747 श्यामसुन्दर मिश्र भौतिक सुखोंकी अंधी दौड़में इनसान प्रकृति और परमात्मा दोनोंसे ही दूरियां बनाता चला आ रहा है। वह भूल चुका है कि जान है तो जहान है और शरीर स्वस्थ एवं मनप्रसन्न है तो ही भौतिक संसाधनोंसे हमें सुख और शान्तिकी प्राप्ति हो सकती है। देहकी संरचनामें प्रकृति और परमात्मा दोनोंकी […]
Post Views: 896 ओशो पुराने संतोंका कहना है करुणापर गौतम बुद्धका जोर एक बहुत ही नयी घटना थी। गौतम बुद्धने ध्यानको अतीतसे एक ऐतिहासिक विभाजन दिया है, उनसे पहले ध्यान अपने आपमें पर्याप्त था, किसीने भी ध्यानके साथ करुणापर जोर नहीं दिया और उसका कारण था कि ध्यान संबुद्ध बनाता है, ध्यान तुम्हारे होनेकी चरम […]
Post Views: 1,020 डा. वरिंदर भाटिया एक कड़वे सत्यके रूपमें कोरोनाके इलाजसे लड़ते देशका वीभत्स मंजर हमारे समक्ष है। एक कहानी थी जिसमें दरवाजेपर लगा पर्दा बहुत खूबसूरत होता है और घरके अंदरका पूरा माहौल बहुत अधिक बदसूरत। कोरोनाकी वजहसे हमारी स्वास्थ्य प्रणालीपर यह पर्दा उठ गया है और भेद भी खुल गया है। पेशेवर […]