Post Views: 742 बाबा हरदेव गुरुका ध्यान करके किया हुआ कर्म ही प्रधान हो जाता है। कई बार मनुष्य चालाकी भी कर जाता है। सोच लेता है कि आज भले मेला देखो, वहां हाजिरी तो लग ही जायेगी। यह दिमागकी चालाकी है। दिमाग जो सोचता है, उसमें बनावट होती है। वास्तवमें भक्ति दिमागका विषय नहीं, […]
Post Views: 462 आर.डी. सत्येन्द्र कुमार स्वतन्त्रत निदेशकोंका मामला फिलहाल नियुक्तिके मुद्देपर नयी चुनौतियोंसे रू-ब-रू है। इनके चलते प्रमोटर्सका अधिकार अब पहले जैसा नहीं रहा। इस परिवर्तनकी चपेटमें पांच सौसे अधिक प्रोन्नायक आ गये हैं। इसके चलते पांच सौसे अधिक अधिसूचित कम्पनियोंके प्रमोटरोंकी अबतक चली आ रही निदेशक विषयक इजारेदारी खत्म हो गयी है। वैसे […]
Post Views: 504 श्रीराम शर्मा असुरता इन दिनों अपने चरम उत्कर्षपर हैं। दीपककी लौ जब बुझनेको होती है तो अधिक तीव्र प्रकाश फेंकती और बुझ जाती है। असुरता भी जब मिटनेको होती है तो जाते-जाते कुछ न कुछ करके जानेकी ठान लेती है। इन दिनों भी यही सब हो रहा है। असुर तो अपने नये […]