Post Views: 865 श्रीराम शर्मा कई बार मनुष्य अपने अनुचित कार्यों और आदतोंके संबंधमें दुखी भी होता है और सोचता है कि उन्हें छोड़ दूं। अवांछनीय अभ्यासोंकी प्रतिक्रिया उसने देखी-सुनी भी होती है। परामर्श उपदेश भी उसी प्रकारके मिलते रहते हैं, जिनमें सुधारनेके लिए कहा जाता है। सुननेमें वह परामर्श सारगर्भित भी लगते हैं। किंतु […]
Post Views: 798 आनन्द उपाध्याय ‘सरस’ भारतके स्वतंत्रता आन्दोलनमें कांग्रेसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। स्वतंत्रताप्राप्तिके बाद दशकोंतक इस राजनीतिक दलका केन्द्र और प्राय: अधिकांश राज्योंमें सत्तारूढ़ पार्टीके रूपमें एकछत्र आधिपत्य स्थापित रहा। हालांकि इस समयान्तरालमें पार्टी विभिन्न अंतर्विरोधोंके चलते लगभग दर्जनभर बार विभाजित भी हुई। लेकिन फिर भी १९६९ के विभाजनके बाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेसने अपने […]
Post Views: 836 सीताराम क्रोध जीवनमें लक्ष्यपूर्तिमें सबसे बड़ी बाधा है। क्रोधकी अवस्थामें व्यक्तिके शरीरमें स्थित अंत:स्रावी ग्रंथियोंसे ऐसे हार्मोंस उत्सर्जित होकर खूनमें मिल जाते हैं जो हमारे शरीरके लचीलेपनको समाप्त कर उसे कठोर बना डालते हैं। इससे हम अपनी मांसपेशियों और अंग-उपांगोंपर नियंत्रण खो बैठते हैं। इससे हमारी कार्य करनेकी स्वाभाविक गति एवं सहजता […]