Post Views: 996 अशोक सावनके महीनेमें प्रत्येक शिवभक्तकी यही कामना होती है कि एक बार बाबा बैद्यनाथका दर्शन जरूर कर ले। कहते हैं सागरसे मिलनेका जो संकल्प गंगाका है वही दृढ़निश्चय भगवान शिवसे मिलनेका कांवडिय़ोंमें भी देखा जाता है। तभी तो श्रावणी मेलके दौरान धूप, बारिश और भूख-प्यास भूलकर दुर्गम रास्तोंपर दुख उठाकर अपने दुखोंके […]
Post Views: 632 श्रीश्री रविशंकर आध्यात्मिकता और राजनीति दोनोंका ही मानवता एवं मानवके साथ गहरा संबंध है। राजनीतिका उद्देश्य सुशासन लाना और भौतिक एवं भावानात्मक सुविधाओंको जनतातक पहुंचाना है। वहीं आध्यात्मिकताका लक्ष्य नैतिकता एवं मानवीय मूल्योंको बढ़ाना है। किसी भी देशकी समृद्धिके लिए राजनीति एवं आध्यात्मिकताका एक साथ चलना अति आवश्यक है। सुशासन एवं अच्छे […]
Post Views: 774 हृदयनारायण दीक्षित व्यक्ति असाधारण संरचना है। शरीर प्रत्यक्ष है। अंत:करण अप्रत्यक्ष है। हमारे कर्म तप भौतिक हैं। इनके प्रेरक तत्व हमारे भीतर हैं। इसकी वाह्य गतिविधि दिखाई पड़ती है। जब हर्ष, उल्लास दुख-सुखके भाव बाहर प्रकट होते हैं। भारतके मनीषियों एवं चिन्तकोंने अंत:करणके उल्लास-संवद्र्धनके लिए अनेक उपाय खोजे हैं। ईश्वरका आनन्ददाता कहा […]