Post Views: 1,220 यदि एक आदमीका सुख दूसरेका दुख होता है तो इसका केवल इतना ही मतलब है कि दूसरा आदमी नासमझ है और उसे भी सुखका कोई पता नहीं है। उसका सुख तभी दुख हो सकता है, जब किसी तरह दूसरेका सुख ईष्र्या बनता हो। लेकिन इसमें दूसरेका सुख जिम्मेदार नहीं है, हमारी ईष्र्या […]
Post Views: 843 आर.डी. सत्येन्द्र कुमार किसी भी देशकी अर्थव्यवस्थामें तेलकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसेमें तेलकी कीमतोंमें उछालका निश्चित अवधितक निर्णायक असर पड़ सकता है। ऐसेमें उत्पादनमें कटौतीके चलते तेलने लगभग १४ माहकी उच्चतम कीमत दर्ज की है। इसमें ओपेकके फैसलेने कटेपर नमक छिड़कनेका काम किया है। इससे सऊदी अरबने कहा है कि पिछले […]
Post Views: 852 विरला ही कोई ऐसा भारतीय होगा जो किसी न किसी क्षेत्रमें बंगालकी असाधारण प्रतिभा एवं तीक्ष्ण बौद्धिकतासे प्रभावित न हुआ हो। परन्तु कैसी विचित्र विडंबना है कि जो बंगाल कला, सिनेमा, संगीत, साहित्य, संस्कृतिकी समृद्ध विरासत और बौद्धिक श्रेष्ठताके लिए देश ही नहीं, पूरी दुनियामें विख्यात रहा हो, वह आज चुनावी हिंसा, […]