वाराणसी

देशके भविष्यके लिए संस्कारित शिक्षाकी जरूरत


प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने बीएचयू के विज्ञान संकाय में जिला प्रशासन एवं विद्या भारती के सहयोग से आयोजित आगनबाड़ी के तीन दिवसीय के तीन दिवसीय कार्यक्रम का सोमवार को दीप प्रज्वलित कर उद्ïघाटन किया। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पित कर एवं पंडित मदनमोहन मालवीय की प्रतिमा पर माल्यार्पण तथा राष्टï्रगान के साथ हुआ। अपने संबोधन में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि नयी शिक्षा नीति में बहुत बल है। इसमें से चार वर्ष, चार से पांच एवं पांच से छह वर्ष की शिक्षा आंगनबाड़ी का हिस्सा है। भारत के भविष्य के लिए नन्हे मुन्नों को संस्कारित शिक्षा से संस्कारित शिक्षा से बढ़ाया जाए। मातृभाषा से सीख जल्दी होती है और नयी शिक्षा नीति में इसका समावेश है। बच्चे को शुरुआती आठ वर्ष तक जो सिखाया जाता है उसका ८० फीसदी सीख उसकी आदत में ढल जाती है। अत: प्रारंभिक शिक्षा अति महत्वपूर्ण है। आंगनवाड़ी में आने से पहले बच्चे ने घर में क्या देखा, क्या सुना, कैसा व्यवहार देखा, कैसे बात की वही सब लेकर आंगनबाड़ी में आता है और वैसा ही करता है। इसको आंगनवाड़ी में समझना होगा कि बच्चे में क्या गुणवत्ता है तथा क्या कमी है, कमियों का पता भी लगायें। फिर उसी अनुरूप अच्छा संस्कारवान बनाने का उसके साथ बात, व्यवहार, पढ़ाई, खेल आदि क्रियाकलाप करें। राज्यपाल ने कहा कि संसाधनों की कमी नहीं है। आंगनबाड़ी केंद्र को अनुपमशाला बनायें। पर्वों, त्योहारों पर उसके अनुरूप राखी बनाना, राष्ट्रीय पर्व पर महापुरुषों की वेशभूषा में सजाना आदि कार्यों को प्लानिंग कर करें और संकल्प के साथ करें। इसका बहुत अच्छा असर होगा। प्राइमरी टीचर विशेषकर फाउंडेशन बनाने वाले की बच्चा बड़ा होकर चाहे वह बिजनेसमैन बनेए अधिकारी बने, कोई बड़ा स्तर प्राप्त करें वह टीचर सदैव उसे याद रहता है। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने आंगनबाड़ी के बच्चों को टूर नहीं गांव में ही टूर कराने जिसमें पंचायत भवनए पोस्ट आफिस, गांव का बाजार आदि दिखाने का सुझाव दिया। इससे बच्चों में देखकर वहां काम करने की उत्सुकता होगी। जिसे पूछ कर सवाल-जवाब की वार्ता करें। गांव के गणमान्य व्यकितयों से मुलाकात कराएं। बच्चों की उम्र के अनुरूप सरल योगा के क्रियाकलाप जिसमें अच्छे से बैठना, हाथ पैर ऊपर नीचे करना आदि कराये। इससे अच्छी आदत पड़ेगी। खेल, खिलौना, प्रदर्शनी कीट आदि के माध्यम से भाषा, गणित, विज्ञान, रंगो, अंकों का ज्ञान कराएं। पर्यावरण, संयुक्त परिवार, राष्ट्रप्रेम, अच्छी सीख विषयक बाल कहानियां रोचक ढंग से सुनाएं और उन्हें बच्चों के सुननेए पूछने व बोलने की सहभागिता कराएं। उन्होंने गुजरात में अपने मंत्रिमंडल के दौरान के आंगनवाड़ी के सुधार हेतु किए गए अनुभव को भी साझा किया और बताया कि गुजरात में अच्छे कार्य करने वाली आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों वहां के डीएम को हजारों रुपए की नगद धनराशि से पुरस्कृत किया गया। इसके लिए माता यशोदा अवार्ड दिया जाता है। आनंदी बेन पटेल ने कहा कि कार्य की गुणवत्ता एवं सुधार के लिए प्रशिक्षण बहुत उपयोगी होता है। इस अवसर पर उन्होंने विद्या भारती द्वारा बाल शिक्षा हेतु तैयार की गयी। पुस्तिका ‘प्रारंभिक बाल्यावस्था, देखभाल और शिक्षाÓ का विमोचन किया। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि पुस्तिका में बाल शिक्षा के बहुत महत्वपूर्ण, रोचक, उपयोगी सामग्री का समावेश है, जो संस्कारित शिक्षा के लिए बहुत उपयोगी होगी। कार्यक्रम में उपस्थित प्रदेश की मंत्री स्वाती सिंह ने राज्यपाल का अंग वस्त्र, स्मृति चिन्ह एवं पुष्पगुच्छ से स्वागत किया। अपने संबोधन में मंत्री ने कहा कि विद्या भारती के साथ आगनवाड़ी का यह प्रशिक्षण कार्यक्रम राज्यपाल की प्रेरणा से हो रहा है। सेवापुरी ब्लाक में आंगनवाड़ी का कार्य की सराहना करते हुए उन्होंने कहा यह पूरे प्रदेश के लिए अनुकरणीय है। इस अवसर पर शिक्षा भारती के पदाधिकारी एवं विभागीय अधिकारीगण तथा लगभग ३५० आंगनवाड़ी कार्यकर्ता उपस्थित रहे।