पटना

बिहार बजट: किसानों की आमदनी बढ़ाने पर नीतीश सरकार का जोर


      • 11 हजार 742 करोड़ रुपये खर्च होंगे
      • हर खेत को पानी योजना में होगी तेजी

पटना (आससे)। बिहार सरकार ने इस बार अपने बजट में किसानों की आमदनी बढ़ाने पर खास जोर दिया है। इसके लिए सरकार ने किसानों से जुड़े सभी विभागों के माध्यम से लगभग 11 हजार 742 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रावधान किया है। सरकार ने कृषि विभाग के बजट में भी इजाफा किया है तो किसानों के हर खेत तक पानी पहुंचाने के लिए चार विभागों को अलग से पैसा दिया है।

जल संसाधन, लघु जल संसाधन, सहकारिता और पशुपालन विभाग के माध्यम से भी किसानों को समृद्धि बढ़ाने को कई योजनाएं ली गई हैं। साथ ही अनाज खरीद योजना में पारदर्शिता को बढ़ाने को पैक्सों का कंप्यूटराइजेशन किया जाएगा तो राज्य के बाजारों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से भी जोड़ा जाएगा।

खेतीबारी को नया रूप देने का संकल्प सरकार के बजट में दिख रहा है। गत वर्ष राज्य में कृषि विकास का दर 3.7 रहा है। इसे और आगे बढ़ाने की योजना है। इसके लिए सरकार ने इस बार केवल कृषि विभाग का बजट 3584 करोड़ का रखा गया है। बजट में किसानों को उद्यमी बनाने की योजना है। मौसम अनुकूल खेती के लाभ से किसानों को अवगत कराने के प्लान पर मजबूती से काम करने का संकल्प है। सरकार ने रोजगार बढ़ाने के साथ किसानेां की आमदनी बढ़ाने को खाद्य प्रसंस्करण नीति पर इस बार का शुरू करेगी। नीति बनकर तैयार है।

इसके अलावा राज्य सरकार ने कृषि निवेश प्रोत्साहन नीति भी बनाई है। इसके तहत कृषि आधारित उद्योग को बढ़ावा देने का फैसला किया है। मखाना, फल, सब्जी, शहद, औषधीय और सुगंधित पौधों, चाय तथा बीज आधारित उद्योग लगाये जाएंगे। इस नीति में अनुदान की व्यवस्था की गई है।

राज्य सरकार सीएम बीज विस्तार योजना को जारी रखने का फैसला किया है। इस योजना में अब तक बड़ी उपलब्धि मिली है। हर फसल का बीज प्रतिस्थापन दर बढ़ा है। इस साल सरकार ने हाईब्रीड बीज देने की योजना बनाई है। यह हर गांव में आधा एकड़ में अनाज और एक चौथाई एकड़ के लिए दलहन और तेलहन का बीज दिया जाएगा।

हर खेत को पानी योजना को जमीन पर उतारने की जिम्मेदारी सरकार ने चार विभागों को दी है। इस योजना के लिए सर्वे का काम पूरा हो चुका है। अब सभी विभागों को जमीन पर उतारने का काम चलेगा। इसके लिए सरकार 600 करोड़ रुपये की व्यवस्था अलग से की गई है। इस बार किसानों की सलाह से 29 हजार 952 योजनाओं का चयन किया गया है।

राज्य सरकार पशुपालन के माध्यम से किसानों की आमदनी बढ़ाने पर 1589 करोड़ रुपये खर्च करेगी। राज्य में दूध प्रसंस्करण क्षमता को बढ़ाने का फैसला किया है। इसके लिए पशुपालकों को भी सहयोग दिया जाएगा। इसके लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग कर दूध उत्पादन बढ़ाने के साथ प्रसंसकरण क्षमता का विस्तार होगा। देसी गोवंश के संरक्षण के लिए पटना में गोवंश विकास संस्थान की स्थापना की जाएगी।

सरकार नये वित्तीय वर्ष में जल संसाधन विभाग से लंबित सिंचाई योजनाओं को पूरा करने के साथ बाढ़ प्रबंधन की कुछ नई योजनाओं पर भी काम शुरू करेगी। सरकार ने इस विभाग का बजट 9801.74 करोड़ का रखा है। विभाग इस वर्ष बाढ़ रोकने के लिए बनी 232 योजनाओं पर 600 करोड़ रुपये खर्च करेगी। इसके अलावा नदी पर बांध बनाने की योजना तटबंध को और मजबूत बनाने का काम भी जाराी रहेगा। जयनगर में कमला नदी पर बराज के लिए 405 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। इसे अगले साल पूरा कर लेना है। पश्चिमी कोसी परियोजना का शेष कार्य भी 2023 में पूरा किया जाना है। इससे 64 हजार 240 हेक्टेयर में सिंचाई होगी।

गया फल्गू नदी में विष्णुपद मंदिर के पास सालोभर पानी उपलब्ध कराने के लिए 266 करोड़ की योजना का काम इस साल तक पूरा करने का लक्ष्य है। जल-जीवन-हरियाली के तहत राजगीर, गया, बोधगया और नवादा शहरों में पेयजल की आपूर्ति के लिए गंगा योजना का काम तेज होगा। अब तक इसमें 78 प्रतिशत काम हो चुका है। शेष काम का लक्ष्य इस वित्तीय वर्ष में है।