Post Views: 541 ओशो ध्यान या समाधिका यही अर्थ है कि हम अपनी खोल और गिरीको अलग करना सीख जायं। वह अलग हो सकते हैं। इसलिए ध्यानको स्वेच्छासे मृत्युमें प्रवेश और जो मनुष्य अपनी इच्छासे मृत्युमें प्रवेश कर जाता है, वह मृत्युका साक्षात्कार कर लेता है। सुकरात मर रहा है, आखिरी क्षण है। जहर पीसा […]
Post Views: 969 हृदयनारायण दीक्षित प्रकृति सदासे है। परिवर्तनशील है। अखंड सौभाग्यवती भी है। प्रकृतिका एक-एक अंश गतिशील है। प्रकृतिके अणु और परमाणु न केवल गतिशील है, बल्कि नाच रहे हैं। ऋग्वेदमें सृष्टिके उद्भवका सुंदर उल्लेख है। चौमासाके चार माह व्रत उपासनाका सुंदर अवसर है। विद्वानोंने १२ महीनोंमेंसे चार महीनेका दायित्व, कर्तव्य और आनन्दको एक […]
Post Views: 1,215 विश्व पर्यावरण दिवस 2022 की थीम, ‘केवल एक पृथ्वी’, प्रकृति के साथ सद्भाव में रहने पर केंद्रित है जब पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ सामग्री खरीदना चाहते हैं, तो जूट मेरी सूची में सबसे ऊपर है। जूट न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि यह एक अत्यंत टिकाऊ फाइबर भी है जो […]