Post Views: 754 डा. प्रदीप कुमार सिंह मानव द्वारा प्राकृतिक संसाधनोंका दोहन, संसाधनों के लिए बढ़ता संघर्ष व अन्य प्राणियों के लिए बढ़ती संवेदनहीनता, आदि पर्यावरण के लिए खतरा बन चुके है। पौराणिक इतिहास में उल्लेख है कि जब-जब ऐसा हुआ, पृथ्वीने गाय का रूप धारण कर ब्रह्मा, विष्णु, महेशके समक्ष अपनी पीड़ा प्रस्तुत करते […]
Post Views: 553 डा. प्रदीप कुमार सिंह कई देश कोरोना महामारीकी दूसरी या तीसरी लहरसे गुजर चुके हैं। अधिकांश देशोंमें दूसरी लहरका प्रकोप पहली लहरसे तीव्र रहा है। भारतमें १५ जनवरीसे ८ मार्चतक ५२ दिनोंकी अवधिमें दैनिक संक्रमितजनोंके आकड़े न्यूनतम स्तरपर लगभग स्थिर दिखायी दिये एवं १ फरवरीको संख्या सबसे कम ८५८७ रही। जनवरीमें महामारी […]
Post Views: 722 आवश्यकता आविष्कारकी जननी है। यह बहुत पुरानी कहावत है लेकिन इसकी प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है। कोरोना संकट कालमें इस वायरसको परास्त करनेके लिए पूरी दुनियाके सक्षम देशोंने नये-नये आविष्कारोंके लिए मजबूत कदम आगे बढ़ाया जिसके अनेक सार्थक परिणाम सामने आये हैं। चाहे वह टीका हो या दवाएं, इनका उपयोग कोरोनाके […]