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म्यांमार में सैन्य तख्तापलट के 2 साल बाद UN प्रमुख ने लोकतंत्र को लेकर उठाई आवाज,


यूनाइटेड नेशंस, म्यांमार में सेना ने दो साल पहले सरकार से सत्ता हथिया ली थी। अब संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख एंटोनियो गुटेरेस (Antonio Guterres) ने म्यांमार के लोगों की लोकतांत्रिक आकांक्षाओं के लिए अपनी आवाज उठाई है। इसके साथ उन्होंने चेतावनी दी है कि नागरिकों व राजनीतिक नेताओं पर कार्रवाई के बीच सेना के नियोजित चुनाव देश में अस्थिरता को बढ़ा सकते हैं। संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा कि महासचिव म्यांमार (Myanmar) में सभी प्रकार की हिंसा की कड़ी निंदा करते हैं, क्योंकि इससे देश के हालात बिगड़ रहे हैं और ये गंभीर क्षेत्रीय प्रभाव को भी बढ़ावा दे रहा है।

नेताओं को किया गया था गिरफ्तार

सेना ने एक फरवरी, 2021 को आंग सान सू की की चुनी हुई सरकार से सत्ता हथिया ली थी। इसके बाद उन्हें और उनकी सत्तारूढ़ नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी पार्टी के शीर्ष नेताओं को गिरफ्तार कर लिया था। पार्टी ने नवंबर 2020 के आम चुनाव में दूसरे कार्यकाल के लिए शानदार जीत हासिल की थी। सुरक्षा बलों ने घातक बल के साथ सैन्य शासन के व्यापक विरोध को दबा दिया। लगभग 2,900 नागरिक मारे गए और हजारों लोगों को गिरफ्तार किया गया। इस बर्बर कार्रवाई ने देश के अधिकांश हिस्सों में लोगों को हथियार उठाने के लिए मजबूर कर दिया। सैन्य सरकार ने सेना शासन का विरोध करने वाले प्रमुख संगठनों को “आतंकवादी” समूह घोषित कर दिया।

सेना ने बनाया नया कानून

अब सेना ने राजनीतिक दलों के पंजीकरण पर एक नया कानून बनाया है। जिसे शुक्रवार को सामने लाया गया। इससे विपक्षी समूहों के लिए इस साल के अंत में होने वाले आम चुनाव में सेना समर्थित उम्मीदवारों को चुनौती देना मुश्किल हो जाएगा। सेना का नया नियम पार्टियों के लिए न्यूनतम स्तर निर्धारित करता है। जिसमें 2020 के चुनावों की तुलना में सदस्यता स्तर 100 गुना अधिक है। साथ ही इसमें धन की सख्त आवश्यकताएं भी शामिल हैं।

बर्बर घटनाओं के बीच चुनाव से चिंतित हैं यूएन प्रमुख

संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता ने कहा कि गुटेरेस ने राजनीतिक नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पत्रकारों की गिरफ्तारी व उत्पीड़न पर आपत्ति जाहिर की है। इसके साथ, वो हवाई बमबारी और नागरिक घरों को जलाने के बीच चुनाव कराने के सेना के घोषित इरादे से चिंतित हैं। यूएन प्रमुख मानते हैं कि ये प्रस्तावित चुनाव देश में अस्थिरता को बढ़ाएंगे। दुजारिक ने कहा कि गुटेरेस म्यांमार के लोगों के साथ से खड़े हैं। वो शांतिपूर्ण, न्यायपूर्ण समाज व रोहिंग्या सहित सभी समुदायों की सुरक्षा के लिए उनकी लोकतांत्रिक आकांक्षाओं का समर्थन करते हैं।

रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ भेदभाव

बता दें कि बौद्ध बहुल म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ लंबे समय से भेदभाव व अत्याचार होता आया है। अगस्त 2017 में म्यांमार की सेना ने रोहिंग्या द्वारा पुलिस व सीमा रक्षकों पर हमलों के जवाब में उत्तरी रखाइन राज्य में निकासी अभियान शुरू किया। तब 700000 से अधिक रोहिंग्या बांग्लादेश भाग गए, जहां वो शिविरों में रहते हैं। जनवरी 2020 में, अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने म्यांमार को रोहिंग्या के खिलाफ नरसंहार को रोकने के लिए हर संभव प्रयास करने का आदेश दिया। वहीं, दो दिन पहले म्यांमार की सरकार द्वारा स्थापित एक स्वतंत्र आयोग ने निष्कर्ष निकाला कि ये मानने के कारण थे कि सुरक्षाबलों ने रोहिंग्या के खिलाफ युद्ध अपराध किए लेकिन उसे नरसंहार नहीं कहा जा सकता है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव का स्वागत

गुटेरेस ने 21 दिसंबर को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा म्यांमार पर अपनाए गए पहले प्रस्ताव का स्वागत किया। जिसमें दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्र में हिंसा को तत्काल समाप्त करने और सैन्य शासकों से सू की सहित सभी मनमाने ढंग से हिरासत में लिए गए कैदियों को रिहा करने का आग्रह किया गया है। इस प्रस्ताव में विरोधी दलों से बातचीत और सुलह करने का जिक्र किया गया है। इसके अलावा, ये सभी पक्षों से मानव अधिकारों, मौलिक स्वतंत्रता और कानून के शासन का सम्मान करने की अपील करता है। दुजारिक ने कहा कि महासचिव प्रस्ताव को एक महत्वपूर्ण कदम मानते हैं और अंतरराष्ट्रीय एकता को मजबूत करने की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं।