Post Views: 730 विष्णुगुप्त आखिर ट्रीटमेंट आतंकवादका प्रश्न सोशल मीडियामें चलकर आम आदमीतक क्यों और कैसे पहुंचा। आम आदमीका समर्थन क्यों हासिल किया। क्या भविष्यमें यह प्रश्न गंभीर बनकर कानून बनानेवाले शासन चलानेवाले दुनियाको दशा-दिशा देनेवाले तत्वोंको भी मथेगा। आम जनता एवं गरीब जनताको भी ट्रीटमेंट आतंकवादसे मुक्ति दिलानेके लिए समुचित और निर्णायक सहित सभी […]
Post Views: 770 प्रवीण गुगनानी भारतीय दलित राजनीति वर्तमान समयमें सर्वाधिक दिग्भ्रमित दौरमें है। दुर्भाग्यसे वर्तमान समय ही इतिहासका वह संधिकाल या संक्रमणकाल है जबकि दलित राजनीतिको एक दिशाकी सर्वाधिक आवश्यकता है। भीम मीमके नामका सामाजिक जहर बाबासाहेब अम्बेडकरके समूचे चिंतनको लील रहा है। भीम मीमके इतिहासको देखना, पढऩा एवं समझना आजके अनसुचित जाति समाजकी […]
Post Views: 918 जग्गी वासुदेव जोउनके लिए सुविधाजनक है और जिसे वह सकारात्मक कहते हैं। इससे वह बेकार हो गये हैं। उन्हें हर चीज बहुत जल्दी चाहिए। किसी भी चीजके लिए कोई समर्पित भाव उनमें नहीं है। यदि कोई वैज्ञानिक होना चाहता है तो उसे कई सालोंतक पढऩा पड़ेगा। हो सकता है कि वह अपनी […]