Post Views: 986 श्रीराम शर्मा व्यक्तित्ववानसे तात्पर्य सुंदरता या साज-सज्जासे नहीं लगाया जाना चाहिए। यह विशेषताएं तो रंगमंचके नट नटियोंमें भी हो सकती हैं। इससे उन्हें आकर्षक मात्र समझा जा सकता है। उन्हें व्यक्तित्ववान नहीं कहा जा सकता। ऐसे लोगोंके प्रति किसीको न श्रद्धा होती है न सम्मान। उन्हें कोई उत्तरदायित्व पूर्ण काम भी नहीं […]
Post Views: 1,552 श्रीश्री रविशंकर जीवनको देखनेके दो तरीके हैं। वह आपकी जिम्मेदारियोंको पूरा करनेके महत्वके बारेमें हैं। चाहे वह धन, शक्ति या कुछ और हो, आप खुशीकी खातिर इसमें जुट जाते हैं। कुछ लोग दुखका भी आनन्द लेते हैं, क्योंकि इससे उन्हें खुशी मिलती है। किसीका सारा जीवन भविष्यमें या किसी दिन खुश रहनेकी […]
Post Views: 908 ओशो उस परम सत्ताको ऋषियोंने ज्ञान कहा है। लेकिन जिस ज्ञानको हम जानते हैं, उस ज्ञानसे उसका कोई भी संबंध नहीं है। हम किसे ज्ञान कहते हैं उसे ठीकसे समझ लें तो ऋषि किसे ज्ञान कहता है उसे समझना आसान हो जायगा। पहली बात तो यह है, सदा किसी ज्ञेयका होता है, […]