Post Views: 883 श्रीराम शर्मा स्वार्थ और अहंकारसे मुक्त होकर औरोंके लिए जो कष्ट उठाया जाता है, वही सच्चा धर्म है। धर्म है औरोंके लिए, राष्ट्र, विश्व, स्वयंका उत्सर्ग। यह प्रक्रिया अत्यंत कष्टदायी अवश्य है, परन्तु इसीमें सुख, शांति एवं संतोष मिलता है। ऐसेमें धर्म कष्टों अथवा संकटोंसे घिरा अवश्य होता है, धर्मके पालनसे कठिनाई […]
Post Views: 624 डा. अम्बुज जिस प्रकार जलवायुका असर पेड़-पौधों और फसलपर होता है। वैसे ही परिवेशका असर आदमीपर होता है, आदमी अपने परिवेशके अनुसार जीता है। आजके दौरका परिवेश वर्तमान एवं आनेवाली पीढ़ीके जीवनको तय करता है। आज जब हर तरफ महंगी, बाजारवाद एवं मुनाफाखोरीका हाहाकार मचा है, आदिम युगके समान आधुनिक भारतमें भोजन […]
Post Views: 541 डा. सुशील कुमार सिंह लोकतंत्रकी धारासे जनताके हित पोषित होते हैं लेकिन जिस तरह संसदमें हो-हल्ला हो रहा है उसे देखते हुए लगता है कि हंगामेसे यह मानसून सत्र तर-बतर रहेगा। वैसे इस बातका पहले ही अंदाजा था कि संसदमें कई मुद्दोंपर संग्राम होंगे। परन्तु यह नहीं मालूम था कि शासन चलानेवाले […]