Post Views: 950 श्रीराम शर्मा मनुष्यका मन कोरे कागज या फोटोग्राफीकी प्लेटकी तरह है, जो परिस्थितियां, घटनाएं एवं विचारणाएं सामने आती रहती हैं और मनोभूमि वैसी ही बन जाती है। व्यक्ति स्वभावत: न तो बुद्धिमान है और न मूर्ख, न भला है, न बुरा। वस्तुत: वह बहुत ही संवेदनशील प्राणी है। समीपवर्ती प्रभावको ग्रहण करता […]
Post Views: 888 राजेश माहेश्वरी म्यूकर मायकोसिस यानी ब्लैक फंगस मुख्य रूपसे उन रोगियोंको प्रभावित करता है, जिनका स्टेरॉयड और अन्य दवाओंके साथ कोरोनाका इलाज किया गया है। इसके अलावा जिन लोगोंको डायबिटीज, कैंसर जैसी दूसरी गम्भीर बीमारियां हैं, वह भी इसकी चपेटमें आ सकते हैं। इस फंगसने रोगियोंको सर्जरीके बाद अपने जबड़े और आंखें […]
Post Views: 1,205 विष्णुगुप्त करीमा बलोच चीन और पाकिस्तानकी उपनिवेशिक नीति एवं करतूत को दुनियाके सामने बेपर्द करनेकी अहम भूमिकामें थीं। करीमाकी हत्या मानवाधिकारके लिए एक खतरेकी घंटी है। करीमाकी हत्यापर संयुक्त राष्ट्रसंघ द्वारा निष्पक्ष और प्रभावशाली जांच होनी चाहिए। तमाम प्रश्न है। दुनियाके नियामकोंकी चुप्पी चिंताजनक है। जबकि करीमा बलोचकी हत्या दुनियामें अभिव्यक्तिकी स्वतंत्रता, […]