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कानून का सही अनुपालन, अधिकार का पूरा उपयोग सर्वोच्च प्राथमिकता-ए. सतीश गणेश


वाराणसी के पहले पुलिस आयुक्त  ने संभाला कार्यभार, अपराधियों, समाज विरोधी तत्वों को कड़ी चेतावनी

उत्तर प्रदेश शासन द्वारा वाराणसी के पहले पुलिस आयुक्त के पद पर तैनात किये गये श्री ए सतीश गणेश ने शनिवार को यहां अपना कार्यभार संभाल लिया। उन्होने अपने कैम्प कार्यालय के सभागार में अपराह्नï पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहाकि कानून का सही अनुपालन करना और अधिकार का पूरा उपयोग करना मेरी सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। उन्होने कहाकि मुझे विश्वास है कि जब हमारे साथ वरिष्ठï मातहत अधिकारी बैठेगे तो पुलिसिंग में अप्रत्याशित सुधार अपने आप नजर आयेगा। उन्होने कहाकि पहले आधारभूत ढांचा तैयार करेंगे उसके बाद अधिकारियों के कार्य का बटवारा करेंगे। उन्होने बताया कि प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पहले से ही पुलिस कमिश्नरेट  की व्यवस्था लागू है। इसे देखते हुए वाराणसी के एसपी प्रोटोकाल, एसपी  ट्रैफिक और एक डिप्टी एसपी को विशेष प्रश्ििक्षण के लिए लखनऊ भेजा गया है। उनके प्रशिक्षित होकर लौटने के बाद काफी कुछ बदल जायेगा। उन्होने कहाकि पहले सारी वस्तुस्थिति की जानकारी प्राप्त की जायेगी। उसके बाद सार एकत्रित करके अमली जामा पहनाया जायेगा।

चुनौतियों से सख्ती से निबटेंगे

नव नियुक्त पुलिस आयुक्त श्री ए सतीश गणेश ने कहा कि वाराणसी महत्वपूर्ण शहर है। यहां तमाम चुनौँतियां भी है। पर्व एवं त्यौहार निकट है इन परिस्थितियों से निबटना चुनौतीपूर्ण कार्य है लेकिन हर परिस्थिति का डंट कर सामना किया जायेगा और हम उस स्थिति से पार पाने में सफल भी होगे। उन्होने बतायाकि  कमिश्नरेट व्यवस्था लागू होने के बाद कई अधिकार भी हमें मिले है जो अब तक दूसरे अधिकारियों के पास निहित था। हम उन अधिकारों का सही उपयोग करेंगे । उन्होंने उदाहरण के तौर पर बताया कि अभीतक पुलिस धारा १५१ के तहत शान्तिभंग की आशंका में लोगों का चालान करती थी लेकिन उसकी जमानत शहरी क्षेत्रों में अपर नगर मजिस्ट्रेट तथा ग्रामीण क्षेत्रों में उप जिलाधिकारी लेते थे लेकिन अब ऐसे लोगों की जमानत का अधिकार पुलिस कमिश्नरेट को मिल गया है।

पुलिस कमिश्नर का कार्यक्षेत्

पुलिस आयुक्त श्री ए सतीश गणेश ने यह भी बतायाकि वाराणसी शहर की पांच सर्किल कोतवाली, कैण्ट, भेलूपुर, चेतगंज और दशाश्वमेघ पुलिस कमिश्नर के अधीन होगी। इन सर्किलों से सम्बन्धित सभी थाने पुलिस कमिश्नर के अधीन होगे। उन्होने बतायाकि शहरी क्षेत्र की ८०प्रतिशत आबादी और ग्रामीण क्षेत्र की २० प्रतिशत आबादी पर पुलिस कमिश्नरेट का नियंत्रण होगा। पुलिस कमिश्नर के अधीन कुल तीन दर्जन राजपत्रित अधिकारी होगे। इसमें दो डीआईजी स्तर के अधिकारी अखिलेश कुमार और अनिल कुमार सिंह होंगे। इसी तरह दो पुलिस अधीक्षक विक्रान्तवीर और अमित कुमार (प्रथम) पुलिस कमिश्नरेट के अधीन कार्य कर करेंगे। इसके अलावा कुछ अपर पुलिस अधीक्षकों और पुलिस उपाधीक्षकों समेत अन्य अधिकारियों की भी जल्दी ही नियुक्ति हो जायेगी।

यातायात में सुधार का वादा

पुलिस आयुक्त ने बतायाकि शहर की यातायात व्यवस्था में सुधार किया जायेगा। उन्होने बतायाकि यहां की यातायात समस्या कई वर्षो से बनी हुई है। उन्होने इस सम्बन्ध में पत्रकारों से सवाल किया कि पूर्व में यहां तैनात रहे दो ज्येष्ठï पुलिस अधीक्षकों ने इस समस्या पर काफी काम किया था। आपलोग उनका नाम बताइयें अधिकाश पत्रकारों ने अजय मिश्र को बताया इस पर पुलिस कमिश्नर ने श्री अनिल अग्रवाल का नाम लिया तो पत्रकारों ने स्वीकार कि उनके समय भी इस दिशा में काफी कुछ काम हुआ था। पुलिस कमिश्नर को पत्रकारों ने कई सुझाव दिये और अधिकतर लोगों ने यातायात व्यवस्था में अधिक्रमण सबसेबडी बाधा बताया। इस पर उन्होने आश्वत किया कि यातायात व्यवस्था में सुधार के लिए ई पेज तैयार किया जायेगा जिसपर लोगों से सुझाव मांगा जायेगा।

साइबर अपराध पर लगेगी रोक

पुलिस कमिश्नर से पत्रकारों से पूछा कि वाराणसी में साइबर अपराध की क्या स्थिति है। इस पर पत्रकारों ने कई घटनाओं का जिक्र किया जिसमें कही एटीएम कार्ड बदल कर तो कही आनलाइन कोड नम्बर पूछ कर लोगों के खाते से पैसे उड़ा दिये गये। इस पर उन्होने स्वीकार किया कि साइबर अपराध में ९९ प्रतिशत वृद्घि हुई है इस पर नियंत्रण के लिए शीघ्र ही कार्य योजना बनाकर काम किया जायेगा। इस पर रोक लगाने के लिए विशेषज्ञ की तैनाती होगीं। साइबर अपराध पर एडवाइजरी भी जारी होगी। समय समय पर समाचार पत्रों में भी इस सम्बन्ध में समाचार प्रकाशित कराये जायेंगे।

एक ईमानदार कोशिश सौ झूठे वादों से बेहतर

पत्रकारों से बातचीत के दौरान पुलिस कमिश्नर का कहना था कि एक ईमानदार कोशिश सौ झुठे वादो से बेहतर है। मैं काम में विश्वास रखता हूं और अपने कार्य को पूरी ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठïा तथा सरकार की मंशा के अनुरूप करने में विश्वास रखता हूं। झूठे वादों में विश्वास नहीं रखता हूं ।

पुलिस आयुक्त ने पत्रकारों से पूछे सवाल

पुलिस आयुक्त ने प्रश्नकाल समाप्त होने केबाद स्वयं पत्रकारों से कुछ प्रश्न किये। उन्होने पूछा क्या अब भी यहां दर्शन पूजन के लिए दक्षिण भारत से आने वाली महिला तीर्थ यात्रियों की गले से सोने की सिकड़ी उड़ाने की घटनायें होती है? क्या उन मामलों की रिपोर्ट दर्ज होती है्? क्या गंगा घाटों के आसपास मादक पदार्थो की बिकी होती है? क्या अब भी गुंडे रंगदारी टैक्स मांगते है? क्या अभी शहर में जुए के अडडे उसी तरह चल रहे है? इसपर अधिकाश पत्रकारों ने स्वीकार किया कि इस तरह की गतिविधिया जारी है। कुछ घटनाओं में कमी आयी है तो कुछ बढ़ी है। रंगदारी टैक्स मांगने वालों में नयी उम्र के अपराधियों की संख्या अधिक है।

पुलिस आयुक्त ने टेका बाबा कालभैरव और विश्वनाथ दरबार में मत्था

वाराणसी के पहले पुलिस आयुक्त श्री ए सतीश गणेश ने शनिवार को यहां पहुंचने के बाद सबसे पहले बाबा काल भैरव और उसके बाद बाबा विश्वनाथ के दरबार में मत्था टेका फिर संकटमोचन मंदिर भी गये थे और अपनी इस नयी पारी की सफलता के लिए उनसे आशीर्वाद मांगा। उन्होनें तीनो मंदिरों में विधिवत  दर्शन पूजन किया। इसके बाद उन्होने पुलिस कार्यालय का निरीक्षण किया। और विभागीय अधिकारियों से परिचय प्राप्त किया। काल भैरव मंदिर में पण्डित नवीन गिरि एवं पण्डित सुमित उपाध्याय ने काल भैरवाष्टïक मंत्रों से उनकी पूजा करायी। पुलिस आयुक्त ने कपूर से आरती भी की।

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ए. सतीश गणेश

पुलिस आयुक्त, वाराणसी

मूल निवासी- दक्षिण भारत (पालन-पोषण,                                         विलासपुर- छत्तीसगढ़)

प्रारम्भिक शिक्षा- कोरबा (छत्तीसगढ़)

उच्च शिक्षा- इंजीनियरिंग (इंद्रौर, मध्यप्रदेश)

पहली नियुक्ति- लार्सन एण्ड टुब्रो (मुम्बई-दो वर्ष)

पहले प्रयास में – सिविल सर्विसेज में चयन (चेन्नई)

भारतीय पुलिस सेवा में – १९९६ में चयन

नियुक्तियां – पुलिस अधीक्षक, चित्रकूट,अयोध्या, पुलिस अधीक्षक इंटलिजेंस, संयुक्त राष्टï्र के मिशन पर कोसवों में नियुक्ति, एसएसपी- गौतमबुद्घ नगर, मथुरा और झांसी, २०१२ में डीआईजी वाराणसी, डीजीपी मुख्यालय लखनऊ, डीआईजी कानून व्यवस्था (लखनऊ), आईजी जोन (लखनऊ), पीएसी, आईजी आगरा और अब पुलिस आयुक्त वाराणसी।

प्राथमिकता- अधिकार का सही उपयोग करना, कानून का राज स्थापित करना, पुलिसिंग में सुधार, आम जनता की कसौटी पर खरा उतारना और वाराणसी शहर की यातायात व्यवस्था में अमूलचूर परिवर्तन करना, अपराधियों के खिलाफ कड़े कदम उठाना।