Post Views: 594 अवधेश कुमार परिस्थितियां चाहे जितनी विकट हो निर्णय हमेशा वर्तमानके साथ भविष्यका ध्यान रखते हुए लिया जाना चाहिए। घनघोर संकटों और विकट परिस्थितियोंमें आम आदमी अपना धैर्य खो देते हैं और दबावोंमें देश ऐसे फैसले करता है जो वर्तमानके साथ भविष्यमें भी उनके लिए दूसरे संकट और बड़ी चुनौतियोंका कारण बनता है। […]
Post Views: 450 अवधेश कुमार मोदी जब बंगलादेशके सत्खीरा स्थित शताब्दियों पुराने ५१ शक्तिपीठोंमेंसे एक जेशोरेश्वरी काली मंदिरमें पूजा अर्चना कर रहे थे, सोने और चांदीके मुकुट चढ़ा रहे थे और वह लाइव भारतमें दिखा तो फिर विरोधी और विश्लेषक यह टिप्पणी करेंगे ही कि बंगालके हिंदू मतदाताओंको लुभानेके लिए किया जा रहा है। इसी […]
Post Views: 799 पी.के. खुराना सन् १९९१ में पीवी नरसिंह रावके प्रधान मंत्रित्व कालमें उदारवादकी शुरुआत की। उससे देशकी अर्थव्यवस्थामें कई बड़े परिवर्तन आये। कांग्रेसने पहली बार इंदिरा गांधीके समाजवादी गणराज्यकी परिकल्पनासे परे सोचा और वैश्विक कंपनियोंको भारतमें विदेशी निवेश आमंत्रित किया। भविष्यमें तकनीक सिर्फ सपोर्ट सिस्टम न रहकर उद्योगोंकी दिशा निर्धारित करेगी। इसीसे भारतीय […]