Post Views: 813 श्रीराम शर्मा यदि किसीका व्यवहार अनुचित प्रतीत होता है तो यह माननेसे पहले कि सारा दोष उसीका है, स्वयंपर भी विचार अवश्य करें। दूसरोंपर दोषारोपण करनेका आधा कारण तो स्वयं समाप्त हो जाता है। कई बार ऐसा भी होता है कि किसीकी छोटी-सी भूल या अस्त व्यस्ततापर आप मुस्करा देते हैं या […]
Post Views: 616 हमारे पास कोरोना वैक्सीन उपलब्ध हैं। वहीं तस्वीरका दूसरा रुख यह कि कोरोनाकी दूसरी लहरका कहर दिनों दिन बढ़ता जा रहा है। चिकित्सा क्षेत्रसे जुड़े अनुभवी लोग भी कोरोनाकी बदले हुए रूपको लेकर भ्रमित है। संक्रमणकी तीव्रता मरीज और डाक्टर दोनोंका बचाव और संभलनेका अवसर ही नहीं दे रही है, नतीजन मौतका […]
Post Views: 882 श्रीराम शर्मा मनुष्यका मन कोरे कागज या फोटोग्राफीकी प्लेटकी तरह है, जो परिस्थितियां, घटनाएं एवं विचारणाएं सामने आती रहती हैं और मनोभूमि वैसी ही बन जाती है। व्यक्ति स्वभावत: न तो बुद्धिमान है और न मूर्ख, न भला है, न बुरा। वस्तुत: वह बहुत ही संवेदनशील प्राणी है। समीपवर्ती प्रभावको ग्रहण करता […]