Post Views: 11 भारत जैसे लोकतांत्रिक राष्ट्रमें लोकतांत्रिक मूल्योंकी मजबूती उसके संविधानपर टिकी हुई है। संविधानमें निहित प्रावधान कई कारकोंको ध्यानमें रखकर बनाये जाते हैं, ताकि उनके अनुपालनके जरिये एक समावेशी और लोकतांत्रिक व्यवस्थाका मजबूतीसे निर्माण किया जा सके। शिक्षा, एक ऐसा ही कारक है, जिसपर समुचित ध्यान दिये बिना न्यायके साथ विकासकी अवधारणा पूरी […]
Post Views: 8 डा. सुशील कुमार सिंह जुलाई २०१९ में राज्यसभामें एक प्रश्नके जवाबमें जब स्वराष्टï्र मंत्रालयने कहा कि देशद्रोहके अपराधसे निबटनेवाले भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के प्रावधानको खत्म करनेका कोई प्रस्ताव नहीं है तब इसके खात्मेंकी बाट जोहनेवालोंको नाउम्मीदी मिली थी। सरकारने यह भी कहा कि राष्टï्रविरोधी तथ्योंका प्रभावी ढंगसे मुकाबला करनेके लिए प्रावधानको […]
Post Views: 9 अर्थव्यवस्थाको क्षति पहुंचायेगा ऋण यदि उद्यमी ऋण लेकर उद्योग स्थापित करता है, अधिक लाभ कमाता है और उस अतिरिक्त लाभसे ऋणका भुगतान करता है। ऐसेमें ऋणका सदुपयोग उत्पादक कार्योंके लिए होता है। लेकिन यदि ऋणका उपयोग घाटेकी भरपाईके लिए किया जाय तो उसका प्रभाव बिलकुल अलग होता है। खपतके लिए उपयोग किये […]