Post Views: 923 ओशो विचारकी वीणाके तार इतने खिंचे हुए हैं कि उनसे संगीत पैदा नहीं होता और मनुष्य विक्षिप्त हो गया है। यह विचारकी वीणाके तार थोड़े शिथिल करने अत्यंत जरूरी हो गये हैं, ताकि वह समस्थितिमें आ सकें और संगीत उत्पन्न हो सके। विचारका केंद्र मस्तिष्क है और भावका केंद्र हृदय है और […]
Post Views: 1,354 श्रीश्री रविशंकर शिव कोई व्यक्ति या शरीर नहीं है। शिव वह शाश्वत तत्व है, जो सब तत्वोंका सार है। यह वह मूल तत्व है, जिससे प्रत्येककी उत्पत्ति एवं पालन होता है और इसीमें सब विलीन हो जाता है। इस अति सूक्ष्म एवं अप्रत्यक्ष तत्वको कोई कैसे समझ या समझा सकता है। नटराज […]
Post Views: 866 डा. धनंजय सहाय महात्मा गांधीने जिन समस्याओंसे हमें अवगत कराया था उनपर स्वतन्त्र भारतमें सत्तानशीं होनेवाली सरकारोंने ईमानदारीसे अमल नहीं किया। यही कारण है कि स्वच्छता जैसे मसलेपर आजादीके लगभग सात दशकों बाद मोदी सरकारको अभियान चलाना पड़ा। पर्यावरण प्रदूषण मुद्दा अत्यन्त गम्भीर है। इसपर गांधीजीके विचार अत्यन्त प्रासंगिक हैं। इस बातमें […]