Post Views: 1,415 रवि शंकर कृषि भारतीय अर्थव्यवस्थाकी रीढ़ है। सभी व्यवस्थाएं अर्थव्यवस्थासे जुड़ी हैं। वर्तमानमें करीब ७० फीसदीसे ज्यादा कृषि आधारित व्यवस्था मुनाफा कमा रहे हैं लेकिन इस खाद्य श्रृंखलामें किसान ही है। उसे प्रकृतिकी मार, बाजारका शोषण, हरित क्रांतिकी दोषपूर्ण व्यवस्था और नयी आर्थिक नीतिका हमला, सब एक साथ झेलना पड़ रहा है। […]
Post Views: 1,091 डा. गौरीशंकर राजहंस पूरे देशमें २५ दिनमें प्रतिदिन बीस हजारसे बढ़कर कोरोनाके रोगी एक लाख प्रतिदिन हो गये हैं और प्रतिदिन नये मामलोंमें कोई कमी नहीं हो रही है, बल्कि बढ़ते ही जा रहे हैं। सबसे खराब हालत महाराष्ट्रकी है जहां मुम्बई जैसे महानगरमें एक तरहसे सीमित लाकडाउन लगा दिया गया है। […]
Post Views: 1,192 अरुण नैथानी नये वर्षमें महामारीके अंधियारेमें डूबी दुनियाको रोशनीकी किरण तब नजर आयी, जब कारगर वैक्सीन तलाशनेकी मुहिम सिरे चढ़ी। यूं तो वैक्सीन खोजनेके सैकड़ों प्रयास पूरी दुनियामें हुए। उनको लेकर तमाम दावे भी किये गये। लेकिन विश्वसनीयताकी कसौटीपर जिस वैक्सीनको खरा बताया गया, वह थी जर्मनीकी बायोएनटेक द्वारा अमेरिकी फर्म फाइजरके […]