पटना

आरा: बैग कारोबारी हत्याकांड में कुख्यात खुर्शीद सहित 10 को मृत्युदंड


अलग-अलग सेक्शन में दो लाख 60 हजार रुपये का अर्थ दंड भी

आरा। रंगदारी नही देने पर धर्मनचौक स्थित शोभा मार्केट के एक दुकान में अंधाधुन गोली चलाकर व्यवसायी की हत्या करने के एक मामले में नवम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार ने सोमवार को खुर्शीद कुरैशी व उसके भाई समेत दस आरोपियों को मृत्युदण्ड व जुर्माना की सजा सुनाई। अभियोजन की ओर लोक अभियोजक नागेश्वर दुबे व एपीपी नागेन्द्र सिंह ने बहस किया था। सजा के बिंदु पर उन्होंने कोर्ट से कहा कि यह मामला रेयर ऑफ रेयरेस्ट का है।

आरोपियों का आपराधिक इतिहास है, कोर्ट से सभी आरोपियों को मृत्युदण्ड की सजा देने का आग्रह किया। वहीं बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने कहा कि रेयर ऑफ रेयरेस्ट का मामला नही बनता है, कम से कम सजा देने का आग्रह किया। बहस डिजिटल मोड़ में हुआ। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आरा जेल में सभी आरोपी उपस्थित थे। श्री सिंह ने बताया कि 6 दिसम्बर 2018 को दोपहर में नगर थानान्तर्गत धर्मन चौक स्थित शोभा मार्केट में दुकानदार अकील अहमद व उसके भाई इमरान को अंधाधुन गोली चलाकर गम्भीर रूप से जख्मी कर दिया गया था।

घटना स्थल पर ही नगर थानांतर्गत दूध कटोरा के दुकानदार इमरान की मौत हो गई थी। जख्मी के बयान पर नगर थाना में खुर्शीद कुरैसी व उसके भाई समेत अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। जिसमें कहा गया था कि उससे दस लाख रुपया रंगदारी की मांग किया गया था। जब देने से इनकार किया तो उनलोगों ने दुकान पर आकर अंधाधुन गोली चलाई।

नवम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार ने 12 बजे दिन में दोषी पाते हुए आरोपी नगर थानान्तर्गत काजी टोला के खुर्शीद कुरैशी व अब्दुल्ला कुरैशी, नजीर गंज के राजू खान, रोजा के अनवर कुरैशी, मिल्की मुहल्ला के अहमद मिंया, खेताड़ी मुहल्ला के बबली मियां, तौशिफ आलम व फुरचन उर्फ फुचन मियां, रोजा के गुड्डू मियां व अबरपुल मुहल्ला शमशेर मियां को भादवी की धारा 302/34 तहत मृत्युदण्ड व एक-एक लाख अर्थदण्ड, 307/34 के तहत दस-दस वर्ष के सश्रम कैद व पचास-पचास हजार रुपया अर्थदण्ड, 387/34 के तहत सात-सात वर्ष के सश्रम कैद व पचास-पचास हजार रुपया अर्थदण्ड, 120 बी के तहत सात-सात वर्ष के सश्रम कैद व पचास-पचास हजार रुपया अर्थदण्ड व 27 आर्म्स एक्ट के तहत सात -सात वर्ष के सश्रम कैद व दस -दस हजार रुपया अर्थदण्ड की सजा सुनाई। सभी सजाए साथ-साथ चलेगी।