सम्पादकीय

कोरोनाका बढ़ता खतरा


देशमें कोरोना वायरसका खतरा निरन्तर गहराता ही जा रहा है। पांच महीनेके बाद नये मामले पिछले २४ घण्टोंमें ५० हजारसे पार पहुंच गये। इसी अवधिमें २५१ मरीजोंकी मृत्यु भी हुई। देशमें कुल संक्रमितोंकी संख्या १,१७,८७,५३४ हो गयी। इनमें ५३,४७६ नये मामले शामिल हैं। इसके पहले २३ अक्तूबर, २०२० को कोरोना वायरसके नये मामले ५० हजारसे अधिक दर्ज किये गये थे। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालयकी ओरसे गुरुवारको जारी आंकड़ोंके अनुसार देशमें सक्रिय मरीजोंकी संख्या ३,९५,१९२ हो गयी है। पिछले २४ घण्टोंके दौरान पांच राज्यों महाराष्ट्र, पंजाब, केरल, कर्नाटक और छत्तीसगढ़से अधिक नये मामले सामने आये। चिन्ताकी बात यह है कि २४ घण्टोंमें कोरोना मामलेमें १३ प्रतिशतकी वृद्धि है। कोरोनाके तीन नये रूपों (म्यूटेशन) की पुष्टि होनेसे यह चिन्ता और भी बढ़ गयी है। इनमें ब्रिटेन, अफ्रीकी और ब्राजीलके वायरस है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड सहित १८ राज्योंमें ऐसे नये रूप मिले हैं, जो काफी संक्रामक और खतरनाक है। यह शरीरके प्रतिरक्षा तंत्रसे बचकर संक्रामकताको बढ़ाता है। इसके संक्रमणकी गति भी तेज है। अन्य वायरसमें भी म्यूटेशन लगातार हो रहा है लेकिन अभी यह ज्ञात नहीं हो सकता है कि इसका मानवपर कितना असर है। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालयने भी नये म्यूटेशनपर गम्भीर चिन्ता व्यक्त की है। दोहरे म्यूटेशन वैरियण्ट इसलिए भी खतरनाक हो सकता है कि इसमें वायरसके एक ही रूपमें दो परिवर्तन हुए हैं। यह संक्रमणकी गतिको बढ़ा सकता है। अभी नये रूपोंके वायरसपर विशेष अध्ययनकी जरूरत है जिससे कि इसके वास्तविक खतरेका अनुमान लगाया जा सके। वैसे इससे बचावके लिए पुराने तरीकेको अपनाना बहुत ही आवश्यक है। इसमें लापरवाही प्राणघातक सिद्ध हो सकती है। फरवरी, २०२१ के मुकाबले मार्च २०२१में संक्रमणके मामलोंमें पांच गुनी वृद्धि हुई है। मई २०२० के बाद दैनिक मामलोंमें यह सबसे तेज वृद्धि है। साथ ही कोरोनासे होनेवाली मौतोंकी भी संख्या बढ़ी है। यदि स्थितिको नियंत्रित नहीं किया गया तो अमेरिका और ब्राजीलसे आगे भारत निकल सकता है। इसलिए जांच बढ़ानेके साथ ही टीकाकरणके अभियानको तेज करना होगा। अभीतक ५,३१,४५,७०९ लोगोंको कोरोनाका टीका लगाया जा चुका है। भारतकी पूरी जनसंख्याकी तुलनामें अभी टीकाकरणको तेज गति देनेकी जरूरत है। सरकारने देशमें कोरोना संक्रमणमें आयी तेजीको देखते हुए टीकेके निर्यातपर फिलहाल रोक लगाकर उचित निर्णय किया है। भारतने अबतक ७६ देशोंको छह करोड़से अधिक टीकेका निर्यात किया है, जो देशमें कुल टीकाकरणकी संख्यासे अधिक है। देशके सभी नागरिकों और आयु वर्गके लोगोंको अनिवार्यत: टीका लगाया जाना चाहिए जिससे कि कोरोनाके बढ़ते खतरेका सामना किया जा सके। आम जनताको भी बचावके उपायोंका सख्तीसे अनुपालन करना होगा।

किशोर न्यायमें बड़ा कदम

किशोर न्यायके लिए जिला मजिस्ट्रेटको अतिरिक्त शक्तियां प्रदान कर केन्द्र सरकारने त्वरित न्यायकी दिशामें महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इससे किशोरोंके साथ होनेवाले अन्यायपर तो लगाम लगेगी, साथ ही उन्हें त्वरित न्याय भी मिल सकेगा। किशोरोंके न्यायसे सम्बन्धित गतिविधियोंमें जो शिथिलता आयी थी, उसके चलते किशारोंको अनावश्यक रूपसे दंडित होना पड़ता था। ऐसेमें केन्द्र सरकारने उनके सक्षम अधिकारी जिलाधिकारीको यह अधिकार दे दिया है कि वह अपनी बढ़ी हुई शक्तिका उपयोग कर किशोरोंसे जुड़े मामलोंके निस्तारणमें त्वरित काररवाई सुनिश्चित करें। यह किशोरों और न्याय दोनोंके हितमें होगा। इसके लिए लोकसभाने किशोर न्याय (बच्चोंकी देखभाल एवं संरक्षण) विधेयक २०२१ को मंजूरी दे दी है। इसमें बच्चोंसे जुड़े मामलोंका तेजीसे निस्तारण सुनिश्चित करने तथा जवाबदेही बढ़ानेके लिए जिला मजिस्टे्रट तथा अतिरिक्त जिला मजिस्टे्रटको अतिरिक्त शक्तियां देकर सक्षम बनाया गया है। इसके तहत जिलाधिकारियोंको कानूनके निर्वाध अनुपालन सुनिश्चित करने और कठिनाईमें पड़े बच्चोंके लिए सुसंगत प्रयास करनेका अधिकार प्राप्त हो गया है। महिला एवं बाल विकासमंत्री स्मृति ईरानीने कहा है कि बच्चोंकी देखभाल करनेवाले संस्थानों एवं शैक्षणिक संस्थानोंमें काम करनेवालोंकी पृष्ठïभूमिकी जांच की जायगी। यह उचित है, क्योंकि कुछ लोगोंने इसे अपनी आमदनीका जरिया बना लिया है। इसलिए जितने भी सुधारगृह हैं उनकी समय-समयपर जांच सुनिश्चित होनी चाहिए। किशोरोंके न्यायसे जुड़े मामलोंपर त्वरित गतिसे काररवाई सुनिश्चित होनी चाहिए। इसके साथ ही उनके पुनर्वासकी समस्याका निस्तारण भी किया जाना चाहिए जिससे वह विकासकी मुख्यधारामें शामिल हो सके। केन्द्र सरकारके इस कदमसे न्यायके निस्तारणको नि:सन्देह गति मिलेगी। इसके लिए जरूरी है कि ऐसे मामलोंकी समय-समयपर समीक्षा हो और निगरानी तंत्र मजबूत बनाया जाय।