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गुजरात विधानसभा: वोट बंटवारे का हिसाब, 1990 तक कांग्रेस के पास था 50% वोट शेयरिंग; फिर BJP..!


नई दिल्‍ली, । Gujarat Assembly Election 2022: चुनाव में वोट शेयरिंग बेहद मायने रखता है। आमतौर पर वोट शेयरिंग प्रतिशत ही सीटों में बदल कर पार्टियों की जीत और हार तय करता है। गुजरात विधानसभा चुनाव की बात करें, तो आंकड़े बताते हैं कि जिस पार्टी को 50 फीसद के आसपास वोट शेयरिंग मिलता है, उसी पार्टी को सबसे ज्‍यादा सीटें मिलती है और उसी की सरकार बनती है। गुजरात विधानसभा चुनाव के इतिहास पर नजर डालें, तो 1962 से 1990 तक कांग्रेस के पास 50 प्रतिशत वोट शेयरिंग रहा।

गुजरात में 1990 के बाद से कांग्रेस का बुरा दौर…!

गुजरात में 1990 के बाद कांग्रेस पार्टी का बुरा दौर तब शुरू हो गया, जब जनता दल चुनावी मैदान में उतरा। इससे कांग्रेस के वोट शेयर में बड़ा बट्टा लगा। 1990 के गुजरात विधानसभा चुनावों के नतीजे जब सामने आए, तो कांग्रेस का वोट प्रतिशत सिर्फ 38 फीसद रह गया था। इसके बाद अगले चुनावों में कांग्रेस का वोट शेयर और गिर गया। इसके बाद तो 27 सालों से कांग्रेस फिर से गुजरात में सत्‍ता में आने की कोशिश कर रही है, लेकिन सफल नहीं हो पा रही। 1995 में भाजपा को गुजरात में लगभग 49 फीसद वोट शेयर मिला। भाजपा का ये सिलसिला 2017 तक जारी रहा। अब गुजरात विधानसभा 2022 में किस पार्टी को कितना वोट शेयर मिलता है, इस पर बहुत कुछ निर्भर होगा।

गुजरात में 1962 से 2017 किस पार्टी को कितने प्रतिशत वोट मिले…

  • साल 1962 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को सबसे ज्यादा 50.84 फीसदी वोट मिले था। वहीं, प्रजा सोशलिस्ट पार्टी को 22.90 फीसदी और स्वतंत्र पार्टी को 35.31 प्रतिशत मतदाओं ने वोट दिया। कांग्रेस के 154 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा था, जिसमें 113 उम्मीदवारों की जीत हुई थी।
  • 1967 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का वोट शेयर घटकर 48.8 प्रतिशत रह गया। चुनाव में कांग्रेस के 168 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा, जिसमें 93 प्रत्याशियों ने जीत हासिल की।
  • 1972 के चुनावों में, कांग्रेस ने फिर से 50.93 का वोट शेयर हासिल किया। इस बार कांग्रेस पार्टी के कुल 168 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा, जिनमें से 140 उम्मीदवारों ने जीत हासिल की। दूसरे स्थान पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (ओ) पार्टी थी। एनसीओ से 138 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा था, जिसमें 16 प्रत्याशी विजयी हुए।
  • 1975 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के वोट शेयर में बड़ा अंतर आया था। 1975 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के 75 उम्मीदवार विजयी हुए लेकिन उन्हें 40.70 प्रतिशत वोट मिले।
  • 1980 में कांग्रेस का वोट शेयर 50.04 फीसदी और भाजपा का 19.98 प्रतिशत था। इन चुनाव में कांग्रेस ने 182 सीटों पर चुनाव लड़ा था और उसे 141 ​​सीटों पर जीत हासिल हुई थी। वहीं, भारतीय जनता पार्टी के 21 उम्मीदवारों ने जीत हासिल की।
  • गुजरात के 1985 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का वोट शेयर 55.55 फीसदी और बीजेपी का 21.43 प्रतिशत था।
  • 1990 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के वोट शेयर में 20 फीसदी की गिरावट आई, जबकि बीजेपी के वोट शेयर में 10 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। तब कांग्रेस का वोट शेयरिंग 30.90 फीसदी रहा और भाजपा का 33.86 प्रतिशत। वहीं, जनता दल का वोट शेयर कांग्रेस से 36.25 फीसदी ज्यादा था।
  • 1995 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी का वोट शेयर 42.51 फीसदी था, जबकि कांग्रेस का वोट शेयर 32.86 प्रतिशत। इस चुनाव में बीजेपी ने 182 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिसमें 121 बीजेपी उम्मीदवार विजयी हुए थे।
  • 1998 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी का वोट शेयर 44.81 फीसदी था, जबकि कांग्रेस का वोट शेयर 35.88 फीसदी था। इस चुनाव में बीजेपी ने 182 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिसमें 117 उम्मीदवार जीते थे।
  • 2002 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी का वोट शेयरिंग 49.85 प्रतिशत था, जबकि कांग्रेस का वोट शेयरिंग 39.59 प्रतिशत था। तब भाजपा को 127 सीटों पर जीत मिली थी।
  • 2007 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के पास 49.12 फीसदी वोट शेयर था। वहीं, कांग्रेस के पास 38.63 फीसदी वोट शेयर था। इस बार भाजपा को 182 में से 117 पर जीत मिली थी।
  • 2012 के नतीजों में भी कांग्रेस को 38.93 फीसदी वोट शेयर मिला था। जिसमें 61 कांग्रेस प्रत्याशी जीते। बीजेपी की बात करें तो बीजेपी के 115 उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है। भाजपा का वोट शेयर 47.85 फीसदी रहा।
  • गुजरात में 2017 के विधानसभा चुनाव में नतीजे के आधार पर वोट शेयरिंग की बात करें तो कांग्रेस ने 77 सीटों पर जीत हासिल की थी और पार्टी का वोट शेयर 41.4 फीसदी पर पहुंच गया। वहीं, हालांकि, भाजपा ने 99 सीट जीतकर सरकार बनाई और उसका वोट प्रतिशत 49.01 रहा।

jagran

गुजरात में इस बार मुकाबला त्रिकोणीय है। भाजपा और कांग्रेस के अलावा आम आदमी पार्टी की चुनाव मैदान में है। आप ने भी चुनाव प्रचार में पूरी ताकत झोंक दी है। ऐसे में देखना दिलचस्‍प होगा कि आम आदमी पार्टी के उम्‍मीदवार किस पार्टी के वोट शेयर में सेंध लगाते हैं।