Post Views: 1,094 दनेश ‘शैलेश’ संघर्षकी सीढिय़ां चढ़कर सफलताके दुर्गपर आसीन होना सबको अच्छा नहीं लगता है। लेकिन जब आप किसीके द्वारा बलात उठाये जानेपर किसी मंच विशेषपर आरूढ़ होते हैं तो वह सफलता आपको भीतरसे न केवल कचोटती है, बल्कि गहन अपराधबोधका भी शिकार बना देती है। लेकिन इसके दूसरी ओर परिश्रम, निष्ठा, ईमानदारी […]
Post Views: 815 डा. हेमेन्द्र कुमार सिंह शिक्षण वह क्रिया है जिसके द्वारा शिक्षक, छात्र तथा विषयके मध्य सम्बन्ध स्थापित होता है। शिक्षक-शिक्षण तथा शिक्षार्थीमें शिक्षक तथा शिक्षार्थी सजीव एवं सक्रिय बिन्दु है। शिक्षक शिक्षणके समय अपने कर्तव्यपथपर अधिक सक्रिय एवं सजीव रहे तब छात्र भी अपने कर्तव्यपथपर अधिक सक्रिय एवं उत्साही रहता है। जबतक […]
Post Views: 876 श्रीश्री रविशंकर अनन्तके लिए तुम क्या कर सकते हो। अवश्य ही ऐसा कुछ नहीं जो बहुत बड़ा या श्रेष्ठ हो। क्योंकि इसके लिए तुम्हें प्रयास करना पड़ता है और प्रयास करनेपर तुम थक जाते हो। इसलिए कोई बड़ा कार्य करना एक अस्थायी अवस्था है। यदि तुम ऐसा कोई काम अनन्त कालके लिए […]