सम्पादकीय

संसदीय कार्यवाहीमें बाधक विपक्ष

डा. श्रीनाथ सहाय    लोकतंत्रमें सरकारका विरोध और उसकी कमियोंको उजागर करनेकी जिम्मेदारी विपक्ष की होती है। लेकिन कुछ तो संसदीय दायित्व होंगे कि संसदकी कार्यवाही चलती रहे। महत्वपूर्ण मुद्दों और विषयोंपर सार्थक बहसके बाद सरकारका जवाब देशके सामने स्पष्टï हो। संसदमें विधेयक पारित किये जायं अथवा संशोधन किये जायं। यह संसद और सांसदोंकी बुनियादी भूमिका […]

सम्पादकीय

प्रेमचन्दका साहित्यिक अवदान

 प्रणय कुमार समन्वय एवं लोकमंगलकी भावना एवं साधना हमारा सार्वकालिक आदर्श रहा है। परंतु बीते कुछ दशकोंसे हमारे सार्वजनिक विमर्श और विश्लेषणका ध्येय जीवन और जगतमें व्याप्त एकत्वको खोजनेकी बजाय और विभेद पैदा करना हो चला है। परस्पर विरोधी स्थितियों-परिस्थितियोंके मध्य समन्वय एवं संतुलन साधनेकी बजाय संघर्ष उत्पन्न करना हो गया है। निहित स्वार्थों एवं […]

सम्पादकीय

सच्चा साधक

श्रीराम शर्मा असुरता इन दिनों अपने चरम उत्कर्षपर हैं। दीपककी लौ जब बुझनेको होती है तो अधिक तीव्र प्रकाश फेंकती और बुझ जाती है। असुरता भी जब मिटनेको होती है तो जाते-जाते कुछ न कुछ करके जानेकी ठान लेती है। इन दिनों भी यही सब हो रहा है। असुर तो अपने नये तेवरके साथ आक्रमण […]

सम्पादकीय

प्रकृतिका प्रकोप

कोरोना संकटकी तीसरी लहरके खतरेके बीच प्राकृतिक आपदाओंने लोगोंकी मुसीबत और बढ़ा दी है। एक ओर जहां भारतके कई राज्योंमें कोरोनाने तेजीसे पांव पसारना शुरू कर दिया है, वहीं भूस्खलन, बादल फटने और आसमानसे बरसती आफतकी वर्षा स्थितिको भयावह बना रही है। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और लद्दाखमें मूसलाधार वर्षा और बादल फटनेसे आयी बाढऩे भारी तबाही […]

सम्पादकीय

तीसरी लहरकी कल्पना बेकार

डा. गोपाल चौरसिया   सूक्ष्मदर्शी यंत्रसे देखनेपर यह शरीर अति सुन्दर विविध प्रकारके कोशिकाओंके समूह जिसे हम उतक कहते हैं, से बना है। इसकी मूल इकाई कोशिका है। शरीर क्रियाका मूल आधार डीएनए एवं आरएनए। डीएनए नाइट्रोजिनस सब यूनिटका बड़ा कण है। यह न्यूक्लियसमें स्थित क्रोमोसोममें पाया जाता है। आरएनए कोशिकाके न्यूक्लियस और साइटोप्लाज्म दोनोंमें पाया […]

सम्पादकीय

बेरोजगारीके चलते नौकरी मजबूरी है

डा. राजेन्द्र प्रसाद यह स्थिति बेहद चिंताजनक और हमारी शिक्षा व्यवस्थाकी पोल खोलती हुई है। कोलकताके एक सरकारी मेडिकल कालेजमें मोरचरी यानी कि मुर्दाघरमें शवोंके रखरखावके लिए प्रयोगशाला सहायकके छह पदोंके लिए आठ हजार युवाओंने आवेदन किये हैं। दरअसल आम बोलचालकी भाषामें कहे तो यह डोमका पद है। मजेकी बात यह है कि इस पदके […]

सम्पादकीय

भारतमें भोजन एक जरूरत नहीं

 डा. अम्बुज इस प्रकार जलवायुका असर पेड़-पौधों और फसलपर होता है। वैसे ही परिवेशका असर आदमीपर होता है, आदमी अपने परिवेशके अनुसार जीता है। आजके दौरका परिवेश वर्तमान पीढ़ी एवं आनेवाली पीढ़ीके जीवनको तय करता है। आज जब हर तरफ महंगी, बाजारवाद एवं मुनाफाखोरीका हाहाकार मचा है, आदिम युगके समान आधुनिक भारतमें भोजन एक जरूरत […]

सम्पादकीय

ध्यान

वी.के. जायसवाल ध्यान ऐसी क्रिया है जिसमें व्यक्ति शरीरसे अलग होनेका अनुभव कुछ उसी तरहसे करता है जिस प्रकारसे मृत्युके समय अनुभव किया जा सकता है। गहरे ध्यानकी क्रियाका अनुभव हो या मृत्युके समयका अनुभव हो दोनोंमें ही बहुत कुछ समानताएं है क्योंकि दोनोंमें ही शरीरको छोडऩेका अनुभव होता है बस अंतर केवल इतना है […]

सम्पादकीय

खतरेका संकेत

देशमें कोरोना संक्रमणके दस प्रतिशत दरवाले जिलोंकी संख्यामें वृद्धि तीसरी लहरका खतरा गहरानेका संकेत है, जिसे गम्भीरतासे लेनेकी आवश्यकता है। पहली बार दस प्रतिशत दरवाले जिलोंकी संख्या ४७ से बढ़कर ५४ हो गयी है। इन जिलोंकी संख्यामें और वृद्धिकी आशंका बनी हुई है। ऐसे जिले केरल और पूर्वोत्तरके राज्योंतक सीमित हैं। महाराष्टï्रकी स्थिति भी चिन्ताजनक […]

सम्पादकीय

नष्ट होता संसदका मूल्यवान सत्र

राजेश माहेश्वरी     संसदमें पेगासस मामलेको लेकर गतिरोधके हालात बने हुए हैं। भारी शोरशराबे और हंगामेके चलते संसदकी कार्यवाही बार-बार बाधित हो रही है। इन हालातोंमें संसदका बहुमूल्य समय तो नष्टï हो ही रहा है, वहीं देशके आम आदमीसे जुड़े अन्य महत्वपूर्ण मुद्दोंको भी विपक्ष द्वारा नजरअंदाज किया जा रहा है। कोरोना कालमें संसदका मानसून सत्रका […]