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PAGD को झटका, NC मिलकर नहीं अकेले दम पर जम्मू-कश्मीर की 90 सीटों पर लड़ेगी चुनाव


श्रीनगर, एकजुट नजर आ रहे पीपुल्स एलांयस फार गुपकार डिक्लेरेशन (पीएजीडी) में सबकुछ ठीक नहीं है। पीएजीडी की प्रमुख घटक नेशनल कांफ्रेंस (नेंका) की कश्मीर प्रांतीय इकाइ ने बुधवार को एक प्रस्ताव पारित कर आगामी विधानसभा चुनावों में सभी 90 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है। अंतिम फैसला पार्टी प्रमुख डा फारूक अब्दुल्ला लेंगे, लेकिन नेकां की प्रांतीय इकाई का प्रस्ताव पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी महबूबा मुफ्ती के लिए एक बड़ा झटका है।

जम्मू कश्मीर में फिलहाल मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण की प्रक्रिया जारी है। मतदाता सूचियों का अंतिम प्रकाशन नवंबर में होगा और उसके बाद किसी भी समय विधानसभा चुनाव कराए जा सकते हैं। जम्मू कश्मीर में जून 2018 को पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार भंग हो गई थी। उसके बाद पहले राज्यपाल शासन लागू रहा है और जम्मू कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 के लागू होने के बाद 31 अक्टूबर 2019 से उपराज्यपाल के पास प्रशासनिक बागडोर है।प्रदेश में सभी दल यथाशीघ्र चुनाव कराए जाने की मांग कर रहे हैं।महबूबा मुफ्ती ने ही करीब दो माह पहले सुझाव दिया था कि पीएजीडी के घटकों को अलग अलग चुनाव लड़ने के बजाय मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ना चाहिए।

उन्होंने कहा था कि जम्मू कश्मीर की जनता चाहती है कि हम सभी एकजुट होकर अपने खोए सम्मान और पहचान को प्राप्त करें। जिन मुश्किल हालात से हम सभी लोग ,जम्मू कश्मीर की जनता गुजर रही है, उसे देखते हम सभी काे एकजुट होकर ही चुनाव लड़ना चाहिए।जुलाई में डा फारूक अब्दुल्ला ने कुपवाड़ा में एक जनसभा के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहा था कि जम्मू कश्मीर में जब भी विधानसभा चुनाव होंगे, पीएजीडी के घटक मिलकर आपसी सहमति के आधार पर अपने उम्मीदवार मैदान में उतारेगी। मिलकर चुनाव लड़ा जाएगा ताकि भाजपा और उसके समर्थक दलों केा हराया जा सके।

आज सांय तक सभी यह मानकर चल रहे थे कि नेशनल कांफ्रेंस में पीएजीडी के बैनर तले चुनाव लड़ने के मुद्दे पर कोई मतभेद नहीं है। आज यहां पार्टी उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला की अध्यक्षता में कश्मीर प्रांत की नेकां इकाई के सभी प्रमुख पदाधिकारियों एक बैठक हुई। इसमें प्रदेश के मौजूदा हालात, जम्मू कश्मीर में मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण समेत विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक में पार्टी महासचिव अली मोहम्मद सागर, अतिरिक्त महासचिव डा मुस्तफा कमाल, प्रांतीय प्रधान नासिर सोगामी समेत सभी वरिष्ठ नेता मौजूद थे।बैठक में मौजूद नेकां नेताओं ने पीएजीडी में शामिल पीडीपी, माकपा, अवामी नेशनल कांफ्रेंस समेत विभिन्न दलों के नेताओं व कार्यकर्ताओं की आलोचना करते हुए कहा कि यह लोग आए दिन नेकां के खिलाफ बयानबाजी करते हैं। इनके बयान किसी भी तरह से पीएजीडी की नीतियों के अनुरुप नहीं हैं और इनका एकमात्र मकसद सिर्फ नेशनल कांफ्रेंस को नुक्सान पहुंचाना है और नेशनल कांफ्रेंस के सहारे चुनाव लड़ना है। इसलिए पार्टी नेतृत्व को चाहिए कि वह पीएजीडी के बैनर तले अन्य दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ने के बजाय अपने दम पर अकेले चुनाव लड़े।

प्रांतीय समिति के सदस्यों ने बैठक में सर्वसम्मति से एकप्रस्ताव पारित कर आगामी विधानसभा चुनाव में सभी 90सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है।उमर अब्दुल्ला ने इस दौरान बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश में 25 लाख नए मतदाताओं को लेकर जो भी संदेह और असमंजस है, उसे चुनाव आयोग ही दूर सकता है। लोगो में डर है कि यहां का जनसांख्यिकी परिवर्तन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह सब यहां भाजपा जैसे दलों के फायदे के लिए किया जा रहा है,लेकिन जम्मू कश्मीर की जनता इसे नाकाम बना सकती है। यह तभी संभव होगा जब लोग बड़ी संख्या में वोट डालने अपने घर से बाहर निकलें। लोगों को इसके लिए तैयार करना पार्टी कार्यकर्ताओं व नेताओं की जिम्मेदारी है।नेकां प्रवक्ता इमरान नबी डार ने कहा कि प्रांतीय समिति का प्रस्ताव अंतिम नहीं है।

इस विषय पर पार्टी उपाध्यक्ष और अन्य वरिष्ठ नेताओं की पार्टी प्रमुख डा फारूक अब्दुल्ला के साथ बातचीत होगी। इस मुद्दे पर पार्टी की कोर समिति में भी चर्चा होगी और उसके बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा। इस फैसले को आप पीएजीडी में मतभेद नहीं कह सकते, यह पार्टी कार्यकर्ताओं की अपनी राय है। इस संदर्भ में जब पीडीपी के प्रवक्ता सुहेल बुखारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने कहा कि पीडीपी शुरु से ही सभी को साथ लेकर चलने का प्रयास कर रही है। हमें नेकां की प्रांतीय समिति के प्रस्ताव के बारे में कोई जानकारी नहीं है। यह नेकां का आंतरिक मामला है। पीएजीडी के अध्यक्ष तो नेकां प्रमख डा फारूक अब्दुल्ला ही हैं।