Post Views: 686 राजेश माहेश्वरी देखा जाय तो एक ओर हम सरकारको व्यवस्थापर अपनी खीझ और गुस्सा निकालनेसे बाज नहीं आते हैं। वहीं दूसरी ओर हमारा गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार पूरे समाजके लिए खतरेका कारण बन सकता है। वास्तवमें कोरोनाके प्रकोपके सामने सारी व्यवस्थाएं अस्त-व्यस्त हो गयी हैं। यह होना स्वाभाविक भी है। १३५ करोड़की आबादीवाले देशमें […]
Post Views: 812 प्रमोद अर्थव्यवस्थाके अन्य क्षेत्र जब नकारात्मक विकास दर दिखा रहे हों, तब देशके किसानोंका योगदान किसी वरदानकी तरह है। देशके सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में ग्रामीण अर्थव्यवस्थाका योगदान लगभग ४५ फीसदी है। इसी वजहसे उन प्रवासी मजदूरोंको ग्रामोंमें रोजी-रोटी मिल पायी। हालांकि गैरकृषि कार्योंसे देशके ८० करोड़ लोगोंकी आजीविका चलती है, लेकिन […]
Post Views: 1,624 श्रीराम शर्मा असंभवको संभव बनानेवाला अंतर्यात्राका विज्ञान उनके लिए ही है जो अंतर्चेतनाके वैज्ञानिक होनेके लिए तत्पर हैं। योग साधक भी रहस्यवेत्ता वैज्ञानिक होता है। फर्क सिर्फ इतना है कि सामान्य पदार्थ वैज्ञानिक बाह्य प्रकृति एवं पदार्थोंको लेकर अनुसंधान करते हैं, जबकि योग साधक आंतरिक प्रकृति एवं चेतनाको लेकर अनुसंधान करते हैं। […]